पाकिस्तान इस समय एक साथ कई समस्याओं से जूझ रहा है. पहले से गरीबी की मार झेल रहे पाकिस्तान पर पहले बलूच लड़ाकों ने और फिर तालिबान ने कहर बरपाया. जिसके कारण पाकिस्तानी सेना और ISI के बीच आई दरार और भी ज्यादा बढ़ गई है.
पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिफ मुनीर ने आईएसआई के कई शीर्ष पदों पर बड़े बदलाव किए हैं. उन्होंने इसके पीछे खुफिया असफलताओं का कारण बताया है. टीटीपी और बीएलए जैसे चरमपंथी समूहों के हमलों में सेना को भारी नुकसान हुआ है. वहीं इन हमलों के बारे में आईएसआई को जानकारी नहीं थी, इससे सेना में असंतोष बढ़ गया है.
ऑपरेशन सिंदूर के समय से पाकिस्तान का लगातार बुरा समय चल रहा है. पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान को कई बड़े झटके लगे हैं. टीटीपी ने खैबर पख्तूनख्वा में हमले तेज कर दिए, इतना ही नहीं वहां चेकपॉइंट बनाकर वसूली भी हो रही है. वहीं बलूचिस्तान में भी बीएलए ने सेना की चौकियों पर हमला कर दिया, जिसमें कई सैनिक मारे गए.
पाकिस्तान में होने वाली इन सभी घटनाओं के बारे में ISI कोई जानकारी नहीं जुटा सकी. अफगानिस्तान से आने वाले हमलों में भी खुफिया विभाग कमजोर साबित हुआ. जिसके कारण जनता की नजरों में सेना को बार-बार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा.
इस सप्ताह मुनीर ने सेना और आईएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में टीटीपी और बीएलए को खत्म करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए है. मुनीर ने साफ कह दिया कि या तो बेहतर प्रदर्शन करना होगा या फिर हटना होगा. आईएसआई के कई बड़े अफसरों को हटा दिया गया है. सेना की अपनी खुफिया शाखा यूनिट भी छोटा किया गया.
पाकिस्तान में सेना और आईएसआई लंबे समय से एक साथ काम करते रहे हैं. हमेशा से दोनों मिलकर सरकार की दिशा तय करते हैं, लेकिन अब रिश्ते में दरार दिख रही है. ISI की असफलता से सेना को सीधा नुकसान हो रहा है. चरमपंथी हमलों में सैनिकों की जान जा रही है. टीटीपी को पाकिस्तान का दुश्मन नंबर वन माना जा रहा है. उसके सरगना को खत्म करने में नाकामी से मुनीर नाराज हैं.