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नहीं रुका जंग तो थम जाएगा जीवन! इंटरनेट पर भी लग सकता है ब्रेक, दुनिया होगी डिस्कनेक्ट; भारत पर क्या होगा असर?

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण ऊर्जा क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित है. हालांकि अब यह नुकसान डिजीटल दुनिया तक पहुचं चुका है.

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Edited By: Shanu Sharma
नहीं रुका जंग तो थम जाएगा जीवन! इंटरनेट पर भी लग सकता है ब्रेक, दुनिया होगी डिस्कनेक्ट; भारत पर क्या होगा असर?
Courtesy: Grok AI

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण डिजिटल दुनिया खतरे में है. ईरान और उनके समर्थकों द्वारा स्टैट ऑफ होर्मुज और  और लाल सागर के बाब-अल-मंदेब मार्ग पर हमला किया जा रहा है. जिसके कारण इन इलाकों में बिछी इंटरनेट केबल खतरेमें हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन केबलों का नुकसान हुआ तो वैश्विक इंटरनेट पर बड़ा गंभीर असर पड़ सकता है.

ईरान के हमलों का असर अगर इंटरनेट केबल पड़ पड़ता है तो इससे भारत समेत कई देशों की बैंकिंग, डिजिटल सेवाएं और रोजमर्रा की ऑनलाइन जिंदगी प्रभावित हो सकती है. जानकारी के मुताबिक इन दोनों क्षेत्रों में इन दोनों क्षेत्रों में कम से कम 20 फाइबर ऑप्टिक केबलें गुजरती हैं.

अगर केबल टूटे तो क्या होगा?

लाल सागर में 17 केबलें हैं. ये यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ती हैं. हॉर्मुज में एएई-1, फाल्कन, गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल और टाटा-टीजीएन गल्फ जैसी महत्वपूर्ण केबलें सक्रिय हैं. ये केबलें भारत के विदेशी डाटा कनेक्शन में बड़ी भूमिका निभाती हैं. हजारों किलोमीटर लंबी ये पतली केबलें पूरी दुनिया का इंटरनेट ट्रैफिक संभालती हैं.

इन केबल के माध्यम से ही वीडियो कॉल, ईमेल, बैंक ट्रांजैक्शन, क्लाउड सर्विस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी सेवाएं हो पाती है. अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसे बड़े कंपनियों के डाटा सेंटर यूएई और सऊदी अरब में बने हैं, ये सभी केबलों से जुड़े हैं. हॉर्मुज का सबसे संकरा हिस्सा सिर्फ 200 फीट गहरा है, इसलिए केबलों पर खतरा ज्यादा है. हमले, माइन या जहाजों के एंकर से नुकसान हो सकता है.

ऊर्जा के बाद इंटरनेट पर खतरा

भारत का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट इन मार्गों से आता है, अगर केबलें टूट जाती है तो इंटरनेट स्पीड धीमी हो सकती है. बैंकिंग ऐप्स, ऑनलाइन पेमेंट और क्लाउड सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. मरम्मत में महीनों लग सकते हैं क्योंकि युद्ध क्षेत्र में रिपेयर शिप नहीं जा सकतीं. विशेषज्ञों का कहना है कि जानबूझकर हमला कम संभावना है, लेकिन गलती से या युद्ध में नुकसान हो सकता है. मिडिल ईस्ट का संकट उर्जा क्षेत्र से आगे बढ़कर अब डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुका है. विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि दोनों चोक पॉइंट एक साथ प्रभावित होने से बड़ा संकट आ सकता है.