अमेरिका में भारतीय मूल के संघीय न्यायाधीश अमित मेहता ने ट्रंप प्रशासन की उस नीति को गैरकानूनी करार दिया है, जिसके तहत 75 देशों के आवेदकों के ग्रीन कार्ड प्रोसेसिंग पर रोक लगा दी गई थी. अदालत ने कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग (State Department) ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसा फैसला लिया और इससे वीजा संबंधी निर्णय लेने की कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हुई.
ब्लूमबर्ग लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायाधीश अमित मेहता ने माना कि जनवरी में तत्कालीन विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा लागू की गई 'पब्लिक चार्ज' नीति, इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट (INA) के प्रावधानों से मेल नहीं खाती. इस नीति के तहत 75 से अधिक देशों के परिवार-प्रायोजित और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड आवेदनों की प्रक्रिया रोक दी गई थी. प्रशासन का तर्क था कि ऐसे आवेदक भविष्य में सरकारी सहायता पर निर्भर हो सकते हैं.
अदालत ने कहा कि 1952 में बने इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के अनुसार प्रत्येक वीजा या ग्रीन कार्ड आवेदन का मूल्यांकन संबंधित काउंसुलर अधिकारी को स्वतंत्र रूप से करना होता है. न्यायाधीश मेहता ने अपने फैसले में कहा कि नई नीति ने यह अधिकार विदेश मंत्री के स्तर पर केंद्रित कर दिया, जो कानून की मंशा के विपरीत है. अदालत के अनुसार, किसी आवेदन पर पहले से सामूहिक रोक लगाना कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है.
यह मामला एक ब्राजीलियाई नागरिक की याचिका के बाद अदालत पहुंचा था. ईबी-5 निवेशक वीजा कार्यक्रम के तहत उसके ग्रीन कार्ड आवेदन को नई नीति के कारण रोक दिया गया था. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि स्टेट डिपार्टमेंट ने प्रशासनिक प्रक्रिया कानून का उल्लंघन करते हुए उसके आवेदन पर अवैध रूप से निर्णय टाल दिया. अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि आवेदन पूरा पाए जाने पर काउंसुलर अधिकारी उसके मामले का नियमानुसार फैसला करें.
यह फैसला ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीतियों को लेकर सामने आई कानूनी चुनौतियों की श्रृंखला का ताजा मामला है. वॉशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क की संघीय अदालतों में इसी नीति को चुनौती देने वाली कई अन्य याचिकाएं भी लंबित हैं. दूसरी ओर, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने हाल ही में 'पब्लिक चार्ज' नियमों को और सख्त किया है, जिसके तहत यदि किसी आवेदक के सरकारी लाभों पर निर्भर रहने की आशंका हो, तो उसका वीजा या ग्रीन कार्ड आवेदन अस्वीकार किया जा सकता है. हालांकि, स्टेट डिपार्टमेंट ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि सरकार वीजा जांच प्रक्रिया में उच्चतम मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है.