अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ नीति को गलत बताते हुए उसे हटाने का आदेश दिया. अदालत का यह फैसला 6-3 से पास किया गया है. ट्रंप की नीति के खिलाफ लिए गए फैसले में भारतीय इमिग्रेंट्स के बेटे नील कत्याल ने भी सहमति जताई है.
यूनाइटेड स्टेट्स के पूर्व एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल नील कत्याल ने ट्रंप के टैरिफ को 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के इस्तेमाल के खिलाफ बताया है. जिसके बाद उनके नाम की चर्चा और भी तेज हो गई है. हालांकि ट्रंप ने अदालत के इस फैसले को निराशाजनक बताया है और जजों पर हमला बोला है.
कत्याल ने इस फैसले के कुछ पल बाद ही कहा कि आज, यूनाइटेड स्टेट्स सुप्रीम कोर्ट अमेरिकियों के लिए खड़ा हुआ है. इसका मतलब यह बताया जा रहा है कि भले ही अमेरिकी प्रेसिडेंट को दुनिया के सबसे पॉवरफुल लोगों में गिना जाए, लेकिन संविधान उससे भी ज्यादा ताकतवर है.
ट्रंप ने टैरिफ को इकोनॉमिक के लिहाजा से जरूरी बताया था. कत्याल ने कहा कि यह मामला हमेशा प्रेसिडेंसी के बारे में रहा है, किसी एक इंडिविजुअल प्रेसिडेंट के बारे में नहीं. उन्होंने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि हमें खुशी है कि हमारा सुप्रीम कोर्ट, जो 250 सालों से हमारी सरकार की नींव रहा है, हमारे सबसे बुनियादी मूल्यों की रक्षा कर रहा है.
नील कत्याल के माता-पिता डॉक्टर और इंजीनियर थे. भारत से माइग्रेट कर के शिकागों में उन्होंने अपना जीवन बिताया और वहीं कत्याल का जन्म हुआ. कत्याल ने हाई-स्टेक्स कॉन्स्टिट्यूशनल लड़ाइयों में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से ग्रेजुएट की डिग्री ली और US सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के लिए क्लर्क का काम किया. इसके बाद 2010 में उन्हें प्रेसिडेंट बराक ओबामा द्वारा एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया.
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा मामले लड़े हैं. कटियाल को US जस्टिस डिपार्टमेंट का सबसे बड़ा अवार्ड एडमंड रैंडोल्फ से नवाजा जा चुका है. इतना ही नहीं उन्हें 2017 और 2023 में द अमेरिकन लॉयर ने लिटिगेटर ऑफ द ईयर के लिए चुना है. फोर्ब्स ने उन्हें 2024 और 2025 में उन्हें यूनाइटेड स्टेट्स के टॉप 200 वकीलों में रखा गया और ट्रंप के खिलाफ आदेश देकर एक बार फिर चर्चे में आ गए हैं.