नई दिल्ली: होली खुशियों और रंगों का त्योहार है. इस दिन लोग गिले शिकवे भूलकर एक दूसरे को रंग लगाते हैं. लेकिन बाजार में मिलने वाले कई रंगों में केमिकल मिलाए जाते हैं, जो त्वचा पर रैशेज, खुजली और एलर्जी जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं. ऐसे में सबसे अच्छा ऑप्शन है घर पर बना ऑर्गेनिक गुलाल. इसे तैयार करना आसान है और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री ज्यादातर रसोई में मिल जाती है.
पीले रंग के लिए हल्दी सबसे अच्छा विकल्प है. कोशिश करें कि पैकेट वाली हल्दी न लें. हल्दी की गांठ को घर पर पीसकर पाउडर तैयार करें. दूसरा तरीका है कच्ची हल्दी को थोड़ा पानी डालकर पीस लें. इस पेस्ट को मलमल के कपड़े में डालकर रस निकाल लें. अब इसमें अरारोट या कॉर्न स्टार्च मिलाएं. मिश्रण को धूप में सुखा लें. सूखने के बाद ग्राइंडर में हल्का चला लें. तैयार है आपका प्राकृतिक पीला गुलाल.
गुलाबी रंग के लिए चुकंदर का इस्तेमाल करें. चुकंदर को पीसकर उसका रस निकाल लें. अब इसमें कॉर्न स्टार्च या अरारोट मिलाएं. अगर गहरा गुलाबी रंग चाहिए तो रस की मात्रा ज्यादा रखें. हल्का रंग चाहिए तो स्टार्च की मात्रा बढ़ा दें. इसे धूप में सुखाकर दोबारा पीस लें. चाहें तो गुलाब की पंखुड़ियां या अनार का रस भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
हरे रंग के लिए पालक या कोई भी हरी पत्तेदार सब्जी ली जा सकती है. पालक को धोकर काट लें और पीस लें. रस निकालकर उसमें कॉर्न स्टार्च मिलाएं. मिश्रण को धूप में सुखाएं. पूरी तरह सूखने के बाद इसे फिर से पीस लें. इस तरह ताजा और खिला हुआ हरा गुलाल तैयार हो जाएगा.
नारंगी रंग के लिए पलाश के फूल बेहद उपयोगी हैं. बसंत के मौसम में ये आसानी से मिल जाते हैं. फूलों को पीसकर पेस्ट बना लें. इसमें चावल का आटा या अरारोट मिलाएं. इसे धूप में सुखाकर दोबारा ग्राइंड करें. इससे सुंदर नारंगी रंग तैयार हो जाएगा, जो त्वचा के लिए सुरक्षित रहेगा.
अगर आप चाहते हैं कि आपका गुलाल महके भी, तो पीसते समय उसमें कुछ बूंदें इत्र की मिला सकते हैं. इसके अलावा लैवेंडर, चंदन या केवड़ा तेल की हल्की मात्रा भी डाल सकते हैं. गुलाब जल मिलाने से भी हल्की सुगंध आ जाती है. पीसने के बाद गुलाल को कुछ देर थाली में फैलाकर रखें ताकि नमी पूरी तरह खत्म हो जाए.