नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता तय हो गया. व्हाइट हाउस ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि भारत पर अब केवल 18 प्रतिशत की टैरिफ रहेगा. एक्सपर्ट इस डील को भारत की बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं. पिछले कुछ महीनों से भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड टॉक जारी था, जिसे अब अंतिम रुप दे दिया गया.
अमेरिका ने पहले भारत पर रुस से तेल खरीदने की वजह से अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसे अब हटा दिया गया है. हालांकि इस बीच अमेरिका की ओर से कई बार कहा गया कि टैरिफ कम नहीं होंगे, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने दुनिया में बढ़ते तनाव के बीच इस डील को क्रैक कर ही लिया.
एक्सपर्ट की मानें तो भारत ने दुनिया में चल रहे उथल-पुथल को अपने लिए हथियार बनाया. अमेरिका का ईरान के साथ तनाव बढ़ा हुआ है. इसी बीच भारत ने यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड डील पर मुहर लगा लिया, जिससे अमेरिका को यह डर था कि भारत अपने व्यापार के लिए केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं रहेगा और यूरोप को इसका ज्यादा फायदा मिलेगा.
इसी डर ने अमेरिका को इस डील पर समहनत होने के लिए मजबूर कर दिया. जिसके बाद अमेरिका, भारत के साथ 18 प्रतिशत टैरिफ के साथ व्यापार करने के लिए तैयार हो गया. इसे भारत में मौजूद अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर की शानदार शुरुआत भी बताई जा रही है. हालांकि अमेरिका-भारत डील से अन्य कई देशों की चिंता बढ़ गई है. अमेरिका मार्केट में पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश जैसे देशों का मजबूत कॉम्पिटिटर्स आ गया है.
I highly doubt Modi “agreed to stop buying” Russian oil, as Trump claimed. India has, however, reduced its Russian oil imports since the new US Russia sanctions were instituted in November. That, along w/Amb Gor’s push for a deal, likely helped get them to the finish line.
— Michael Kugelman (@MichaelKugelman) February 2, 2026
विशेषज्ञों की मानें तो कुल मिलाकर भारत-यूरोप फ्री ट्रेड डील ने डोनाल्ड ट्रंप पर खास दबाव बनाने का काम किया. इस डील की वजह से भारत को यूरोप के 22 देशों का फायदा मिला. जिससे ट्रंप को यह डर सताने लगा कि कहीं वॉशिंगटन पीछे ना छूट जाए. इसके अलावा जब ईरान के साथ तनाव बढ़ा तो ट्रंप पूरी तरह मजबूर हो गए.
ट्रंप के अधिकारियों का कहना है कि भारत ने रुस से तेल खरीदना बंद कर दिया है, जिसकी वजह से ट्रैरिफ कम कर दिए गए. लेकिन अमेरिकि विश्लेषक माइकल कुगलमैन इस दाबे से सहमत नहीं है. वह इस बात को नहीं मानते की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रुसी तेल खरीदना बंद कर दिया है. इस डील से भारत और अमेरिका का व्यापारिक रिश्ता एक बार फिर से मजबूत होगा.