सत्ता की चाह इंसान को कहां तक गिरा सकती है, इसका खौफनाक उदाहरण महाराष्ट्र और तेलंगाना से सामने आया है. पंचायत चुनाव लड़ने की लालसा में एक पिता ने कानून से बचने के लिए अपनी ही मासूम बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी. जानकारी के अनुसार दो बच्चों के नियम के चलते उसे अयोग्य होने का डर सता रहा था. यह मामला राजनीति, कानून और इंसानियत- तीनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों का नियम लागू है. नांदेड़ जिले के केरुड़ गांव का रहने वाला पांडुरंग कोंडामंगले तीन बच्चों का पिता था, जिससे वह चुनाव लड़ने का पात्र नहीं था. लेकिन चुनावी महत्वाकांक्षा उसके ऊपर इतनी हावी हो गई कि उसने कानून को रास्ते से हटाने का खौफनाक तरीका चुन लिया. आरोप है कि उसने अपनी छह साल की जुड़वां बेटी प्राची को रास्ते की बाधा मान लिया और उसे खत्म करने की योजना बना डाली.
पुलिस जांच के मुताबिक पांडुरंग बेटी प्राची को महाराष्ट्र से तेलंगाना के निजामाबाद जिले में ले गया. 29 जनवरी को निजामसागर नहर में बच्ची को पानी में धकेल दिया गया. इसके बाद वह गांव लौट आया और सामान्य व्यवहार करता रहा. घर आकर उसने बेटी के लापता होने का नाटक किया और पत्नी के साथ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई, ताकि किसी को उस पर शक न हो.
कुछ दिनों बाद निजामसागर नहर से एक बच्ची का शव बरामद हुआ. पहचान न होने पर बोधन ग्रामीण पुलिस ने फोटो सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप स्टेटस पर साझा की. यही एक गलती आरोपी के लिए सबसे बड़ी साबित हुई. महाराष्ट्र के पुलिसकर्मियों ने तस्वीर देखकर बच्ची की पहचान प्राची के रूप में की और तुरंत जांच की कड़ी जुड़ने लगी.
पुलिस ने पांडुरंग से पूछताछ की और उसके मोबाइल की लोकेशन खंगाली. डेटा से साफ हुआ कि वह हत्या के दिन तेलंगाना में मौजूद था. सख्ती से पूछने पर उसने अपराध कबूल कर लिया. जांच में सामने आया कि गांव के सरपंच गणेश शिंदे ने भी उसे चुनाव लड़ने के लिए उकसाया था. दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है. यह मामला सत्ता की भूख में इंसानियत के कत्ल की भयावह कहानी बन गया है.