नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर UN सुरक्षा परिषद यानी UNSC में पाकिस्तान को एक कड़ा और दो-टूक संदेश दिया है, जिसमें कहा गया है कि इस्लामाबाद को आतंकवाद को लगातार संरक्षण देने के नतीजों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए. UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने UNSC की 'UN चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को बनाए रखने और UN-केंद्रित अंतरराष्ट्रीय ढांचे को मजबूत करने' पर हुई खुली बहस के दौरान यह तीखा जवाब दिया.
इस उच्च-स्तरीय मंच पर बोलते हुए राजदूत हरीश ने पाकिस्तान पर लगातार चरमपंथी तत्वों को पालने-पोसने और भारत को निशाना बनाने वाले सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भारत के पास ऐसी आक्रामकता से खुद का बचाव करने का हर संप्रभु अधिकार सुरक्षित है. इस बात पर जोर देते हुए कि पाकिस्तान के कृत्य वैश्विक शांति को कमजोर करते हैं, उन्होंने घोषणा की कि पाकिस्तान को यह स्वीकार करना होगा कि सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के कुछ परिणाम होते हैं.
#IndiaAtUN
— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) May 27, 2026
PR @AmbHarishP delivered 🇮🇳’s statement at the @UN Security Council Open Debate on Upholding the Purposes and Principles of the UN Charter and Strengthening the UN-centered International System. @MEAIndia @IndianDiplomacy pic.twitter.com/IkzJbU2AtL
उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद, कट्टरपंथ और भारत-विरोधी दुष्प्रचार को बढ़ावा देने की पाकिस्तान की रणनीति उसके जन्म के समय से ही चली आ रही है. हरीश ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे पाकिस्तान का लंबे समय से चला आ रहा सिद्धांत - 'हजारों घाव देकर भारत को लहूलुहान करना'- UN चार्टर का समर्थन करने के उसके दावों की पोल खोलता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान के बार-बार किए गए युद्ध, बिना उकसावे के की गई आक्रामकता और लगातार जारी आतंकी अभियान संप्रभुता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं.
UN में भारत का यह कड़ा रुख तब सामने आया, जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के संबंध में एक और भड़काऊ टिप्पणी की थी. इससे पहले, भारत ने चीन और पाकिस्तान द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के संबंध में किए गए उल्लेखों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था.
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग बने रहेंगे. उन्होंने कहा कि किसी भी बाहरी पक्ष को इन क्षेत्रों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि भारत, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC से जुड़े क्षेत्रों पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध ठहराने के प्रयासों का कड़ा विरोध करता है और यह स्थिति पाकिस्तान और चीन दोनों को कई बार बताई जा चुकी है.