नई दिल्ली: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर अपने खिलाफ हो रहे कथित अत्याचारों पर गंभीर चिंताएं जताई हैं. उनकी बहन डॉ. उजमा खान से 20 मिनट की मुलाकात के बाद सामने आया कि इमरान खुद को जान के खतरे में महसूस कर रहे हैं.
इमरान ने जेल में मिल रही परिस्थितियों को ‘मौत की सजा पाए कैदी’ जैसी बताते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ा जा रहा है. पार्टी ने भी प्रशासन पर इसी तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं.
पीटीआई के बयान के अनुसार, इमरान खान पूरी तरह से एकांत कारावास में रखे गए हैं. उनके सेल में न बिजली है और न ही किसी तरह की रोशनी आती है. उन्हें न साफ पानी मिल रहा है, न बेहतर खाना. मेडिकल सहायता भी न के बराबर है. इमरान ने कहा कि उनकी स्थिति एक ऐसे कैदी जैसी बना दी गई है, जिसे मृत्यु दंड मिला हो.
मुलाकात के दौरान इमरान खान ने कहा कि अगर उनकी जान को कुछ हुआ तो इसकी जिम्मेदारी आर्मी चीफ और डीजी आईएसआई पर होगी. उन्होंने दावा किया कि सैन्य प्रतिष्ठान ने उन्हें खत्म करने का मन बना लिया है. इमरान के अनुसार, 'अब उनके पास मेरी हत्या करवाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.' पार्टी ने इसे राज्य-प्रायोजित राजनीतिक उत्पीड़न बताया.
इमरान ने जेल में मिली सुविधाओं को ‘अमानवीय’ बताते हुए कहा कि उन्हें पिंजरे में बंद कर प्रताड़ित किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि पांच दिन तक सेल की बिजली बंद रही. दस दिनों तक उन्हें बाहर निकलने नहीं दिया गया. उनके मुताबिक, उन्हें मानवीय गरिमा से परे रखकर तोड़ा जा रहा है. पार्टी ने कहा कि यह बर्ताव अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के खिलाफ है.
इमरान खान ने आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा कि वे 'मानसिक रूप से अस्थिर तानाशाह' बन चुके हैं. इमरान ने कहा कि मौजूदा सैन्य नेतृत्व राजनीतिक असहमति को कुचलने में लगा है और इसके लिए किसी भी सीमा को पार कर रहा है. उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को ‘अलोकतांत्रिक’ और ‘दमनकारी’ बताया.
डॉ. उजमा खान को कड़े विरोध के बीच अपने भाई से मिलने की अनुमति मिली. उन्होंने बताया कि इमरान मानसिक रूप से मजबूत दिखे और उनका हौसला पहले जैसा ही है. हालांकि, जेल प्रशासन के रवैये को लेकर वह बेहद नाराज थे. उजमा के अनुसार, पार्टी कार्यकर्ताओं को इमरान का संदेश है कि वे दबाव में आने के बजाय संघर्ष जारी रखें.