नई दिल्ली: हाल ही में अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीद पर दी गई 30 दिनों की अस्थायी छूट के बाद भारत में राजनीतिक विमर्श तेज हो गया है. विपक्ष जहां इसे कूटनीतिक स्तर पर अपमानजनक मान रहा है, वहीं केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत की ऊर्जा रणनीति पूरी तरह स्वायत्त है और इसका एकमात्र उद्देश्य हर भारतीय घर तक सस्ती और सुरक्षित ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना है. यह फैसला पूरी तरह राष्ट्रीय सुरक्षा और जनता के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है.
राष्ट्रीय स्वायत्तता और ऊर्जा नीति एक वरिष्ठ सरकारी पदाधिकारी के अनुसार, भारत ने रूसी तेल खरीदने के लिए कभी किसी देश की अनुमति का इंतजार नहीं किया है. अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली अस्थायी छूट केवल लेनदेन की तकनीकी बाधाओं को कम करती है, लेकिन यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को परिभाषित नहीं करती. भारत की ऊर्जा रणनीति 'त्रिपक्षीय चुनौती' यानी सामर्थ्य, उपलब्धता और निरंतरता पर टिकी है. सरकार का प्राथमिक लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय दबावों के बजाय घरेलू उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत प्रदान करना है.
देश की ऊर्जा सुरक्षा के दावों को पुख्ता करते हुए अधिकारियों ने बताया कि भारत के पास वर्तमान में 25 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का विशाल भंडार है. यह स्टॉक देश की जरूरतों के लिए करीब सात से आठ हफ्तों तक पर्याप्त है. यह तेल रणनीतिक रिजर्व, भंडारण टैंकों, पाइपलाइनों और टर्मिनलों में सुरक्षित रखा गया है. सरकार का कहना है कि संकट की बातें केवल कल्पना मात्र हैं और देश की ईंधन आपूर्ति पूरी तरह से सुरक्षित है.
पिछले एक दशक में भारत ने अपने तेल आपूर्तिकर्ताओं का दायरा बहुत व्यापक बनाया है. पहले जहां भारत केवल 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था, अब यह संख्या बढ़कर 40 हो गई है. आपूर्ति के इस विविधीकरण की वजह से वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत की रिफाइनरियां बिना किसी बाधा के सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं. पिछले 12 वर्षों में देश के किसी भी हिस्से में पेट्रोल पंपों का ड्राई न होना भारत के कुशल ऊर्जा प्रबंधन का जीवंत प्रमाण है.
विपक्ष द्वारा उठाए गए 'अपमान' के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकारी अधिकारियों ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है. उनका तर्क है कि विपक्षी दल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की बारीकियों को समझने में विफल रहे हैं. कूटनीति में अक्सर देश अपने घरेलू दर्शकों के लिए भारी-भरकम शब्दों का प्रयोग करते हैं, जिसका जमीनी हकीकत से संबंध नहीं होता. भारत किसी भी खोखले नारे के बजाय राष्ट्रीय हित के आधार पर दुनिया के किसी भी कोने से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है.
अधिकारियों ने साल 2013 के पुराने उदाहरणों का हवाला देते हुए बताया कि पिछली सरकारों के समय भी अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आयात में समायोजन किए गए थे. उस समय भी अमेरिका ने भारत को प्रतिबंधों से छूट दी थी. वर्तमान सरकार का संदेश स्पष्ट है कि वह परिस्थितियों की लगातार निगरानी कर रही है और हर नागरिक के हित में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है. भारत की ऊर्जा नीति किसी भी बाहरी शक्ति द्वारा निर्देशित नहीं है और भविष्य में भी यह स्वायत्त बनी रहेगी.