नई दिल्ली: यूरोप के कई देश इस समय अभूतपूर्व गर्मी का सामना कर रहे हैं. फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रिया और सर्बिया समेत कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है. भीषण गर्मी ने लोगों की दिनचर्या, यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों पर गहरा असर डाला है. वैज्ञानिक इसे हाल के वर्षों की सबसे गंभीर हीटवेव मान रहे हैं. कई स्थानों पर रिकॉर्ड टूट रहे हैं और प्रशासन लोगों की सुरक्षा के लिए लगातार चेतावनियां जारी कर रहा है.
फ्रांस में हीटवेव का असर सबसे गंभीर रूप में दिखाई दे रहा है. अब तक 55 लोगों की जान गर्मी से जुड़ी परिस्थितियों में जा चुकी है. देश के पश्चिमी हिस्सों में तापमान 39 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. प्रशासन ने लोगों को घरों में रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है.
जर्मनी में तेज गर्मी का असर बुनियादी ढांचे पर भी देखने को मिला. अत्यधिक तापमान के कारण कई सड़कों की सतहें फट गईं. ए2 मोटरवे पर सड़क क्षतिग्रस्त होने से करीब 30 वाहन प्रभावित हुए. इस घटना में दो लोग मामूली रूप से घायल हुए और सुरक्षा कारणों से हाईवे का एक हिस्सा बंद करना पड़ा.
ब्रिटेन में जून का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहां तापमान 36.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. वहीं स्पेन, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में भी जून के पुराने तापमान रिकॉर्ड टूट गए. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति सामान्य मौसमी बदलाव से कहीं अधिक गंभीर है.
भीषण गर्मी के कारण कई सांस्कृतिक और सार्वजनिक कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं. पेरिस में बड़े संगीत आयोजनों को रद्द करना पड़ा. नीदरलैंड्स में कई स्कूल अस्थायी रूप से बंद किए गए. सर्बिया में प्रशासन ने विशेष चेतावनी जारी कर लोगों से दोपहर के समय घरों के भीतर रहने की अपील की है.
वैज्ञानिकों के अनुसार इस हीटवेव के पीछे 'ओमेगा ब्लॉक' नामक मौसमीय प्रणाली जिम्मेदार है. यह पैटर्न गर्म हवा को लंबे समय तक एक क्षेत्र में रोककर रखता है, जिससे तापमान लगातार बढ़ता रहता है. जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जलवायु और बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण ऐसी चरम मौसमीय घटनाएं भविष्य में और अधिक देखने को मिल सकती हैं.