अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि से जुड़े विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि राम मंदिर की दान राशि पर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन बाबरी मस्जिद के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर कोई चर्चा नहीं करता. उन्होंने विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और यह भी कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है. इस बीच मामले की जांच एसआईटी और पुलिस के स्तर पर जारी है.
बृजेश पाठक ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल केवल वोट बैंक की राजनीति के तहत राम मंदिर को लेकर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना था कि बाबरी मस्जिद के लिए जुटाए गए धन का क्या हुआ, इस पर कोई सवाल नहीं पूछ रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सनातन धर्म को निशाना बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है. साथ ही उन्होंने सीमावर्ती जिलों के कुछ मदरसों की गतिविधियों पर भी सवाल उठाते हुए जांच और सतर्कता की जरूरत बताई.
VIDEO | Mirzapur: Uttar Pradesh Deputy CM Brajesh Pathak on Ayodhya Ram temple donation controversy, says, "Was money collected for the Babri Masjid or not? It was collected, wasn’t it? Ask about that. Is anyone questioning it? These people from the Samajwadi Party and Congress… pic.twitter.com/wTHfmnKmMs
— Press Trust of India (@PTI_News) June 26, 2026
राम मंदिर दान राशि को लेकर विवाद उस समय बढ़ा, जब समाजवादी पार्टी के एक विधायक ने करीब 7.5 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का आरोप लगाया. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत के आधार पर एफआईआर भी दर्ज की गई है. पुलिस अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही हैं.
जांच के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय से भी एसआईटी ने पूछताछ की है. वहीं विपक्ष का आरोप है कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखी गई है और वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.
अयोध्या विवाद पर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ था. इसी फैसले में नई मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि देने का भी निर्देश दिया गया था. जनवरी 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी. अब दान राशि से जुड़ा विवाद राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है, जबकि पूरे मामले की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.