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India Daily

होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमले के बाद बढ़ा तनाव, संयुक्त राष्ट्र ने रोका रेस्क्यू अभियान; 11 हजार नाविकों की सुरक्षा पर संकट

ओमान के तट के पास एक कार्गो जहाज पर हुए ड्रोन हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट में हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं. सुरक्षा चिंताओं के बीच संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी ने जहाजों की सुरक्षित निकासी का अभियान फिलहाल रोक दिया है, जिससे हजारों नाविक समुद्र में फंसे हुए हैं.

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Edited By: Shanu Sharma
होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमले के बाद बढ़ा तनाव, संयुक्त राष्ट्र ने रोका रेस्क्यू अभियान; 11 हजार नाविकों की सुरक्षा पर संकट
Courtesy: AI

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन ने अपने राहत एवं निकासी अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया है.

यह फैसला ओमान के तट के निकट सिंगापुर के झंडे वाले एक कार्गो जहाज पर हुए ड्रोन हमले के बाद लिया गया. हमले में जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी नाविक के हताहत होने की सूचना नहीं मिली.

11 हजार नाविकों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा

संयुक्त राष्ट्र, ओमान और विभिन्न सदस्य देशों के सहयोग से पिछले कई दिनों से फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चलाया जा रहा था. इसका उद्देश्य उन जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराना था, जो क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण समुद्र में फंसे हुए थे. IMO के अनुसार इस क्षेत्र में लगभग 20 हजार से अधिक नाविक विभिन्न जहाजों पर मौजूद हैं.

इनमें से करीब 11 हजार नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष इवैक्युएशन योजना तैयार की गई थी. राहत अभियान रुकने के बाद इन नाविकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है. IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने स्पष्ट किया कि जब तक निकासी सूची में शामिल जहाजों की सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक अभियान दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि जिस जहाज पर हमला हुआ, वह संयुक्त राष्ट्र के राहत मिशन का हिस्सा नहीं था, लेकिन इस घटना ने पूरे समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य

संयुक्त राष्ट्र पहले ही क्षेत्र में मौजूद सभी जहाजों को बिना अनुमति आवाजाही न करने के निर्देश दे चुका था. IMO ने भी चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने से गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है. योजना के अनुसार जहाजों की आवाजाही तभी शुरू की जानी थी, जब IMO, UKMTO और MICA सेंटर के समन्वित तंत्र के माध्यम से सभी जहाजों से संपर्क स्थापित हो जाए और संबंधित तटीय प्राधिकरणों से मंजूरी मिल जाए.

हाल के दिनों में ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी जहाज संयुक्त राष्ट्र और ओमान द्वारा प्रस्तावित वैकल्पिक समुद्री मार्ग का उपयोग न करे. ड्रोन हमले के कुछ समय बाद ईरान की नई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटीने भी कहा कि आधिकारिक मार्ग से हटकर यात्रा करने वाले जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी नहीं होगी. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए लारक द्वीप के निकट निर्धारित समुद्री कॉरिडोर को ही अधिकृत मार्ग बताया है. दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र और ओमान अपने राहत अभियान के तहत ओमान के समुद्री क्षेत्र वाले मार्ग का उपयोग कर रहे थे. इसी अलग-अलग मार्ग को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद गहराते दिखाई दे रहे हैं.