नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान के बारे में जानकारी दी. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों तक ईरान पर जोरदार हमले करेगा. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ईरान किसी समझौते पर राजी नहीं होता, तो अमेरिका उस देश को स्टोन एज में वापस भेज देगा. इसके साथ ही ट्रंप ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के 32 दिनों के बाद, अमेरिका ने अपने ज्यादातर लक्ष्य हासिल कर लिए हैं.
ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की सेना को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है. उसकी नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है, उसकी वायुसेना तबाह हो गई है, कई टॉप नेता मारे जा चुके हैं और उसकी मिसाइल बनाने वाली ज्यादातर फैक्टरियां नष्ट हो गई हैं. ट्रंप ने देश को संबोधित करते हुए कहा, "हम उन्हें स्टोन एज में वापस भेज देंगे, जहां उनकी असली जगह है."
ईरान को परमाणु हथियार बनाने और इस क्षेत्र में आतंकवादी समूहों का समर्थन करने से रोकना है.
US सेना ने कम समय में ही तेज और निर्णायक प्रगति की है.
ईरान की मिसाइल बनाने और लॉन्च करने की क्षमता में भारी कमी आई है.
ट्रंप ने इस अभियान की तुलना पिछले युद्धों से करते हुए कहा कि अमेरिका ने सिर्फ एक महीने में ही भारी नुकसान पहुंचाया है.
उन्होंने अमेरिकियों को भरोसा दिलाया कि US होर्मुज जलडमरूमध्य से मिलने वाले तेल पर निर्भर नहीं है, इसलिए पेट्रोल की बढ़ती कीमतें कुछ समय के लिए ही हैं और जल्द ही कम हो जानी चाहिए.
ट्रंप ने इजराइल, सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों जैसे अपने सहयोगियों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया. साथ ही उनकी रक्षा के लिए वादा किया.
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कि अगर ईरान लड़ना जारी रखता है या बातचीत करने से इनकार करता है, तो अमेरिका बिजली संयंत्रों जैसे और भी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बना सकता है.
ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि US को ईरान का तेल लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है. उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बनाए रखना है.