अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारी जनसमूह की मौजूदगी पर आश्चर्य व्यक्त किया है. एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार के दृश्य उनकी अपेक्षाओं से बिल्कुल अलग थे.
ट्रंप के अनुसार, उन्हें लगा था कि ईरान के भीतर बड़ी संख्या में लोग खामेनेई के शासन से असंतुष्ट होंगे, लेकिन अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की भागीदारी ने उन्हें हैरान कर दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि जनता की प्रतिक्रिया अलग होगी, जबकि अंतिम संस्कार में दिखाई गई भावनात्मक भागीदारी ने अलग तस्वीर पेश की.
तेहरान में शनिवार को खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए. राजधानी की सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में बैनर और झंडे लेकर पहुंचे. कई स्थानों पर लोगों ने बदला के नारे लगाए और शोक जुलूस में पारंपरिक शिया रीति-रिवाजों के अनुसार छाती पीटकर श्रद्धांजलि दी. पूरे शहर में लगे बड़े-बड़े होर्डिंग और पोस्टरों पर खामेनेई की तस्वीरें दिखाई दीं. अंतिम संस्कार का माहौल सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच संपन्न हुआ.
करीब तीन दशक से अधिक समय तक ईरान का नेतृत्व करने वाले अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी को ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान हुए एक इजरायली हमले में हुई थी. इस हमले में उनके परिवार के कई सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए थे. अंतिम संस्कार का कार्यक्रम कई चरणों में आयोजित किया जा रहा है. पहले तीन दिनों तक उनका पार्थिव शरीर तेहरान में रखा जाएगा. इसके बाद मंगलवार को उसे पवित्र शहर कोम ले जाया जाएगा. पड़ोसी देश इराक में बुधवार को श्रद्धांजलि जुलूस निकाला जाएगा, जबकि गुरुवार को उत्तर-पूर्वी ईरान स्थित उनके गृहनगर मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.
जानकारी के अनुसार, खामेनेई को उनके उन परिजनों के साथ दफनाया जाएगा, जिनकी मृत्यु भी 28 फरवरी के हमले में हुई थी. इनमें उनकी नन्ही पोती ज़हरा मोहम्मदी गोलपायगानी, उनकी बेटी, दामाद तथा उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई की पत्नी भी शामिल हैं. खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई अंतिम संस्कार समारोह में शामिल नहीं हुए. उनके प्रतिनिधियों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रम से दूर रहने की सलाह दी थी. बताया गया कि संभावित सुरक्षा खतरे और इजरायल की ओर से निगरानी या हमले की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया.