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इब्राहिम रईसी की मौत, मोजताबा के लिए 'अवसर,' क्या अगला अयातुल्ला होगा खामेनेई का बेटा?

मोजताबा खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर बन सकते हैं. वे अपने पिता अयातुल्ला की पदवी संभालने के लिए तैयार हैं. इब्राहिम रईसी उनकी राह में सबसे बड़ी बाधा थे, उनकी मौत हो चुकी है.

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Mojtaba Khamenei

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो चुकी है. उनकी मौत में अब लोग साजिश का एंगल ढूंढ रहे हैं. दुनियाभर में ईरान के मित्र देशों में इस हादसे पर शोक जताया जा रहा है. अब ईरान का अगला राष्ट्रपति कौन होगा, इसे लेकर बहस जारी है लेकिन इससे ज्यादा बहस इस बात की हो रही है कि ईरान का सुप्रीम लीडर कौन होगा. ईरान के राष्ट्रपति का पद, ईरान का सर्वोच्च पद नहीं है, उससे ज्यादा 'अयातुल्ला' प्रभावी होते हैं.

वैसे तो राष्ट्रपति ईरान के सबसे बड़े अधिकारी होते हैं लेकिन व्यवहारिकता में वे केवल देश के आतंरिक मामलों तक ही सीमति है. अब सवाल उठ रहे हैं कि ईरान का अगला सर्वोच्च लीडर कौन होगा. जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है मोजताबा खामेनेई.
 
अयातुल्ला बनने के लिए बेचैन मोजताबा!
अगर मोजताबा खामेनेई सुप्रीम लीडर बनते हैं तो विदेशी मामलों से जुड़े सारे फैसले लेने का अधिकार केवल उन्हें ही होगा. राष्ट्रपति का आंतरिक मामलों पर नियंत्रण है. ईरान के राष्ट्रपति के फैसले पर वहां के सुप्रीम लीडर के फैसले हावी पड़ते हैं. राष्ट्रपति के पास प्रशासनिक जिम्मेदारियां होती हैं, वहीं सुप्रीम लीडर के पास असीमित शक्तियां होती हैं.  मोजताबा खामेनेई, राष्ट्रपति से ज्यादा, सुप्रीम लीडर बनने के लिए बेचैन हैं.

राष्ट्रपति नहीं, अयातुल्ला है ईरान का कर्ता-धर्ता
इस्लाम की शिया शाखा, वेलायन-ए-फकीह का मानना है कि अयातुल्ला, ईरान का सबसे बड़ा शासक है, जिसके पास देश से जुड़े सभी अहम फैसला लेने का अधिकार है. वे शिया परंपरा के सबसे बड़े मौलवी हैं, जिनके पास असीमित अधिकार होते हैं. उन्हें इस्लामी न्यायशास्त्र, धर्मशास्त्र और दर्शनशास्त्र का विशेषज्ञ माना जाता है. उनके पास फतवा जारी करने का अधिकार होता है. उनके हर फैसले पर जनता की मुहर लगी होती है.

क्या मोजताबा खामेनेई की हत्या के पीछे मोजताबा खामेनेई का हाथ?
इस्लामी रिपब्लिक ईरान की असली ताकत अयोतुल्ला के पास ही है. साल 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से ही अयातुल्ला देश का प्रमुख और कमांडर-इन-चीफ माना जाने लगा. अयातुल्ला के पास धार्मिक और राजनीतिक दोनों अधिकार होते हैं. अब दावा किया जा रहा है मोजताबा खामेनेई सत्ता में काबिज होने वाले हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि अयातुल्ला के बेटे  मोजताबा खामेनेई ने ही इब्राहिम रईसी का प्लेन क्रैश कराया है क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनके पिता की गद्दी, किसी और को मिले. इब्राहिम रईसी खुद को पैंगबर मोहम्मद का वंशज बताते रहे हैं.

कौन होगा अगला अयातुल्ला?
इब्राहिम रईसी की मौत के बाद से ही, अगले अयातुल्ला के पद को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं. ईरान के संविधान के मुताबिक अगर किसी राष्ट्रपति की मौत होती है तो देश का अतंरिम राष्ट्रपति, देश का उपराष्ट्रपति बनता है. यह पद मोहम्मद मोखबर के पास था. वे अस्थाई राष्ट्रपति हैं. न्यायपालिका के मुखिया और संसद के अध्यक्ष मिलकर, 50 दिनों के भीतर एक राष्ट्रपति चुनाव कराएंगे.  

अब सवाल ये है कि अगला सुप्रीम कमांडर कौन होगा. अयातुल्ला खामेनेई पहले ही 85 साल के हो चुके हैं. उन्होंने 30 साल तक देश का नेतृत्व किया है. राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी उनके उत्तराधिकारी बनने के कतार में थे लेकिन उनकी मौत ने सब बदल दिया. अब चर्चा है कि मोजताबा खामेनेई ही अयातुल्ला होंगे. ईरान मुश्किल वक्त से गुजर रहा है, ऐसे में लोग ईरान के भविष्य को लेकर आशंकित है.

क्या खामेनेई बेटे को सौंपेगा सत्ता?
इब्राहिम रईसी की मौत से अयातुल्ला खामेनेई के बेटे मोजताबा खामेनेई की संभावनाएं बढ़ गई है. वे अब सुप्रीम लीडर बनने की रेस में सबसे आगे हैं. मोजताबा खामेनेई युवा हैं. उनका जन्म 8 सितंबर 1969 को मशहद में हुआ था. अयातुल्ला अली खामेनेई की वह दूसरी संतान हैं. उनका करियर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से शुरू हुआ है. यह विंग, काफी हद तक उनके करीब रहा है. 

वह बेहद कम उम्र में IRGC में शामिल हुए थे. साल 1980 में उन्होंने ईरान-ईराक युद्ध को देखा है. जंग के बाद उन्होंने प्रमुख रूढ़िवादी मौलवियों के मार्गदर्शन में शिया धार्मिक शिक्षा के प्रमुख केंद्र कोम में पढ़ाई की. ईरान का कट्टरपंथी ग्रुप उन्हें बेहद पसंद करता है.

क्या हैं मोजताबा की चुनौतीयां?
मोजताबा खामेनेई के बारे में कहा जाता है कि वे ही अपने पिता का पद संभालेंगे. उनकी राह के हर कांटे हटाए जा रहे हैं, या हट जा रहे हैं. वे अब अपने पिता के फैसलों के पीछे प्रमुख चेहरा होते हैं. ईरान में उनकी तूती बोलती है. सर्वोच्च नेता के तौर पर मोजताबा खामेनेई अभी से मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं.

मोजताबा खामेनेई, अपने पिता की तरह की कट्टरपंथी हैं. वे रूढ़िवादी और दमनकारी नीतियों पर भरोसा करते हैं. वे लोकप्रिय नहीं हैं लेकिन कट्टरपंथियों के बीच में खासे चर्चित हैं.  साल 2009 में राष्ट्रपति के तौर पर कट्टरपंथी महमूद अहमदीनेजाद के सत्ता में आने के बाद जमकर बवाल भड़का था. लोगों का कहना था कि चुनाव में प्रोग्रेसिव उम्मीदवार मीर सौसेन मौसावी के खिलाफ धांधली जानबूझकर कराई गई थी, जिससे अपने पिता का उत्तराधिकार मोजताबा खामेनेई को मिल सके. ईरान के लोग प्रोग्रेसिव सरकार चाहते हैं लेकिन उनकी नियति में ही कट्टरपंथी नेता हैं.