दुनिया के अलग-अलग देशों में इस वक्त संघर्ष जारी है. अमेरिका और ईरान के तनाव की वजह से पूरे मिडिल ईस्ट में टेंशन का माहौल है. वहीं रूस, यूक्रेन, बलूचिस्तान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान समेत कई अन्य देशों में भी रुक-रुक कर तनाव देखने को मिलता है.
दुनिया में बढ़ते संघर्ष और उसके खतरे को देखते हुए पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने मिलकर 7 अगस्त 2026 को एक बड़े सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किया है. जिसे मक्का रक्षा समझौते के नाम से जाना जाता है. इस समझौते के तहत तीनों देशों ने एक दूसरे की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली है. तो चलिए जानते हैं क्या है ये समझौता और भारत पर क्या हो सकता है इसका असर?
सबसे पहला सवाल यह है कि इसमें पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की जब तीनों सदस्य हैं तो इसका नाम मक्का रक्षा समझौता ही क्यों रखा गया? इसका जवाब यह है कि ऐसा इसलिए क्योंकि सऊदी अरब के मक्का स्थित अल-सफा पैलेस में ही इस समझौते पर 7 अगस्त को तीनों देशों के मुखिया ने हस्ताक्षर किया है. इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यही है कि अगर इन तीनों देशों में से किसी एक पर भी हमला होता है तो इसे तीनों देश अपने खिलाफ मानेंगे और फिर उसी के हिसाब से प्रतिक्रिया भी दी जाएगी. इस समझौते को कई जगहों पर इस्लामिक नाटो कहा जा रहा है, हालांकि कुछ रिपोर्ट में इसे सुन्नी नाटो भी बताया गया है. हालांकि ऐसा कहना अभी जल्दबाजी हो सकता है क्योंकि कहा जा रहा है कि तीनों देशों ने शिया बाहुल्य देश ईरान को भी इसमें शामिल होने का न्योता भेजा है.
सवाल यह भी है कि क्या पाकिस्तान के इस समझौते से भारत पर कोई फर्क पड़ सकता है? इस सवाल के जवाब में कुछ जानकारों का कहना है कि इससे भारत पर कुछ खास असर नहीं होगा. हालांकि बांग्लादेश भी इस समझौते में शामिल होने का दावा कर रहा है, अगर ऐसा हो जाता है तो शायद भारत के लिए परेशानी बढ़ सकती है. क्योंकि भारत का पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पहले से ही इसका हिस्सा और दूसरी तरफ से अगर बांग्लादेश भी इसमें शामिल होता है तो भारत को दोनों ओर से घेरने की कोशिश की जा सकती है. हालांकि इसे भी पूरी तरह से सच नहीं कहा जा सकता है क्योंकि इस समझौते में शामिल सऊदी अरब और भारत के बीच अच्छे संबंध हैं, जिसे वे खराब करना नहीं चाहेंगे.