सैनिकों के परिवारों के लिए उच्च शिक्षा से जुड़ी बड़ी राहत सामने आई है. भारतीय सेना और CIMMS-UHMT ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के बीच हुए एमओयू के बाद वीर नारियों और बलिदानी सैनिकों के बच्चों को पढ़ाई में आर्थिक मदद मिलेगी. ऐसे विद्यार्थियों की 100 प्रतिशत ट्यूशन फीस माफ की जाएगी. वहीं पात्र सेवारत और सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों के बच्चों व आश्रितों को फीस में 40 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी. अग्निवीर और उनके आश्रित भी निर्धारित नियमों के तहत इसका लाभ ले सकेंगे.
नई दिल्ली में हुए इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सैन्य परिवारों की अगली पीढ़ी के लिए उच्च शिक्षा को सुलभ बनाना है. एमओयू के तहत वीर नारियों और बलिदानी सैनिकों के बच्चों की पूरी ट्यूशन फीस माफ होगी. इससे आर्थिक दबाव कम होगा और योग्य विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी.
योजना का लाभ केवल बलिदानी सैनिकों के परिवारों तक सीमित नहीं रहेगा. पात्र सेवारत और सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों के बच्चों और आश्रितों को फीस में 40 प्रतिशत तक की राहत दी जाएगी. निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अग्निवीर और उनके आश्रित भी इस सुविधा के दायरे में आएंगे. इससे सैन्य परिवारों के युवाओं को करियर की दिशा में आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा.
CIMMS-UHMT में विद्यार्थियों के लिए कई तरह के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं. इनमें मेडिकल और हेल्थ एजुकेशन, नर्सिंग, पैरामेडिकल, फार्मेसी, मैनेजमेंट और कंप्यूटर साइंस शामिल हैं. इसके अलावा लॉ और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में भी पढ़ाई की सुविधा है. फीस में मिलने वाली राहत के चलते सैन्य परिवारों के युवा अपनी रुचि के अनुसार अलग-अलग करियर विकल्प चुन सकेंगे.
संस्थान के चेयरमैन और शिक्षाविद अधिवक्ता ललित मोहन जोशी ने कहा कि सैनिक देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं. ऐसे परिवारों की शिक्षा और भविष्य को मजबूत करना समाज की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि आर्थिक परिस्थितियों की वजह से किसी सैन्य परिवार का प्रतिभाशाली बच्चा उच्च शिक्षा से दूर न रहे, यही इस पहल का उद्देश्य है.
समझौते के कार्यक्रम में चेयरमैन ललित मोहन जोशी, प्रबंध निदेशक संजय जोशी, अकादमी निदेशक डॉ. सपना जोशी और प्रशासनिक अधिकारी मेजर ललित सामंत समेत भारतीय सेना और संस्थान के प्रतिनिधि मौजूद रहे. इस पहल को सैन्य परिवारों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.