चीन में सेना के भीतर चल रहा भ्रष्टाचार विरोधी अभियान अब अपने सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंच गया है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीनी सेना के बेहद ताकतवर और सीनियर जनरल झांग यूक्सिया को पद से हटा दिया है. यह फैसला न सिर्फ सेना बल्कि चीन की सियासत में भी बड़ी हलचल पैदा कर रहा है.
झांग यूक्सिया चीन की सेना की सर्वोच्च कमान माने जाने वाले केंद्रीय सैन्य आयोग (CMC) के उपाध्यक्ष थे. CMC सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में काम करता है. झांग को चीनी सेना का नंबर-1 जनरल माना जाता था और वे कई दशकों से सेना में अहम भूमिका निभा रहे थे.
चीनी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, झांग यूक्सिया पर अनुशासन और कानून उल्लंघन से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच चल रही है. इसी के चलते उन्हें पद से हटाया गया है. उनके साथ एक और सीनियर अधिकारी जनरल लियू जेनली भी जांच के दायरे में आए हैं, जो ज्वाइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के चीफ ऑफ स्टाफ हैं.
शी जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. खासकर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में उन्होंने कई बड़े अफसरों को हटाया है, कुछ को जेल भी भेजा गया है. हाल के महीनों में इस अभियान की रफ्तार और तेज हुई है.
झांग यूक्सिया सिर्फ सैन्य अधिकारी ही नहीं, बल्कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो के सदस्य भी थे. ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई यह दिखाती है कि शी जिनपिंग किसी को भी बख्शने के मूड में नहीं हैं. जानकारों का मानना है कि यह कदम आने वाले समय में चीन की सेना और राजनीति में बड़े बदलावों का संकेत हो सकता है.
इस कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चीन की अंदरूनी स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में गिनी जाने वाली चीनी सेना में यह बदलाव भविष्य की रणनीति को प्रभावित कर सकता है.