US Israel Iran War

भारत को तीनों तरफ से घेरने की तैयारी में चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ मिलकर रच रहा चक्रव्यूह

अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच चीन ताइवान पर कब्जे की ताक में है. भारत को रोकने के लिए बीजिंग बांग्लादेश और पाकिस्तान के जरिए तीन मोर्चों पर घेराबंदी की चाल चल रहा है, जिससे उसे प्रशांत क्षेत्र में आसानी हो.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने चीन को ताइवान अभियान के लिए सुनहरा अवसर दिया है. चीन के रास्ते में भारत सबसे बड़ी बाधा है. इस अवरोध को हटाने के लिए बीजिंग ने 'थ्री-फ्रंट' रणनीति अपनाई है, जिसमें वह उत्तर में हिमालय से लेकर समुद्र तक भारत को घेरने की योजना बना रहा है. इसमें बांग्लादेश की भूमिका अहम रहने वाली है जिससे भारत की नौसेना को बंगाल की खाड़ी में सीधी चुनौती दी जा सके.

चीन की योजना भारत की सैन्य शक्ति को तीन अलग मोर्चों पर उलझाने की है. उत्तर में वह स्वयं, पश्चिम में पाकिस्तान और पूर्व में बांग्लादेश के जरिए बंगाल की खाड़ी में दबाव बनाएगा. वोल्फगैंग पेटरमैन के अनुसार, यह चाल इसलिए है ताकि भारत अपनी सेना को बांटने पर मजबूर हो जाए. इससे चीन को पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में ताइवान के पास अपनी सबसे ताकतवर सेनाएं लगाने में आसानी होगी और भारतीय हस्तक्षेप का खतरा कम हो जाएगा.

बांग्लादेश के साथ सैन्य गठजोड़ 

शेख हसीना के अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद चीन ने बांग्लादेश के साथ रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई दी है. अब बीजिंग बांग्लादेशी नौसेना के आधुनिकीकरण का सबसे बड़ा फंडिंग स्रोत बन गया है. चीन द्वारा टाइप 035जी डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की आपूर्ति इस रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है. यह सहयोग भारत के पूर्वी समुद्री मोर्चे के लिए एक सीधी सुरक्षा चुनौती पेश कर रहा है और बंगाल की खाड़ी में संतुलन बिगाड़ने की कोशिश है.

समुद्री ठिकानों का विस्तार 

चीन अपनी 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति के तहत बांग्लादेश में बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है. कोक्स बाजार के पास एक नया पनडुब्बी अड्डा बनाया जा रहा है. साथ ही चटगांव और मोंगला बंदरगाहों को बेल्ट एंड रोड पहल में शामिल किया गया है. इससे चीनी नौसेना की पहुंच बंगाल की खाड़ी में बढ़ गई है. यह बुनियादी ढांचा ताइवान अभियान के दौरान भारत से किसी भी समुद्री खतरे को रोकने और निगरानी के लिए तैयार किया गया है.

हवाई ताकत का आधुनिकीकरण 

चीन बांग्लादेश एयर फोर्स को आधुनिक बनाने के लिए 2.2 अरब डॉलर में 20 जे-10सीई लड़ाकू विमान दे रहा है. ये हथियार बांग्लादेश की हवाई ताकत को नई ऊंचाई देंगे. हथियारों का यह सौदा भारत के पूर्वी मोर्चे पर रक्षात्मक दबाव बढ़ाने के लिए किया गया है. बीजिंग चाहता है कि भारत इन क्षेत्रों में सैन्य संसाधनों के प्रबंधन में उलझा रहे और मुख्य ताइवान संघर्ष के समय चीन के लिए दक्षिण एशियाई चुनौती न्यूनतम हो जाए.

भारत के लिए दोहरी चुनौती 

पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश चीन के हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है. हथियारों का यह मिश्रण भारत को बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में एक साथ लड़ने को मजबूर कर सकता है. ट्रंप की दूसरी पारी में क्वाड के कमजोर होने का फायदा चीन को मिल रहा है. वह मालदीव जैसे देशों के साथ सैन्य गठजोड़ बनाकर भारतीय नौसेना को हिंद महासागर में घेरना चाहता है ताकि ताइवान पर कब्जे का रास्ता साफ हो.