Bangladeshi Hindus Protest: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय ने सुरक्षा और न्याय की मांग करते हुए अपना अब तक का सबसे बड़ा सड़क प्रदर्शन किया. राजधानी ढाका, चटगांव, बरिसाल, तंगेल और कुरीग्राम जैसे प्रमुख शहरों में हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन किया और कहा कि हिंदुओं को बांग्लादेश में रहने का अधिकार है. उन्होंने शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को हटाने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमलों के विरोध में शनिवार को लगातार दूसरे दिन ढाका में शाहबाग चौराहे को जाम कर दिया.
विरोध प्रदर्शन में शामिल एक अल्पसंख्यक महिला के हाथों में तख्ती थी, जिसमें लिखा था कि बांग्लादेशी हिंदुओं को बचाओ, हमें न्याय और सुरक्षा चाहिए. अन्य लोगों ने हिंदुओं को बचाओ, मेरे मंदिरों और घरों को क्यों लूटा जा रहा है? हमें जवाब चाहिए, स्वतंत्र बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार जारी नहीं रहेगा, धर्म व्यक्तियों के लिए है, राज्य सभी के लिए है और हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें जैसे नारे लगाए.
Hindus fight back: Thousands of Bangladeshi Hindus have taken to the streets to protest.
Remember: Bangladeshi Hindus form just 7.9% of population amidst 91% Muslims. This is extremely commendable and courageous. If only we could see such mass protests from Indian Hindus too. pic.twitter.com/uAUclpYU5y— True Indology (@TrueIndology) August 10, 2024Also Read
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शाहबाग में प्रदर्शन कर रहे हिंदू अल्पसंख्यकों ने हिंदुओं और उनके घरों, मंदिरों और व्यवसायों की सुरक्षा, उनके खिलाफ हिंसा करने वालों की गिरफ्तारी और बर्बरता, लूट और अत्याचार के लिए मुआवजे की मांग की. देश में दो हिंदू संगठनों (बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद और बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद) ने अल्पसंख्यकों पर हमले को लेकर डेटा जारी किया है.
दोनों हिंदू संगठनों के अनुसार, 5 अगस्त को शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को हटाने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को 52 जिलों में हमलों की कम से कम 205 घटनाओं का सामना करना पड़ा है. हजारों बांग्लादेशी हिंदू हिंसा से बचने के लिए पड़ोसी देश भारत भागने की कोशिश कर रहे हैं.
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के चीफ प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने शनिवार को अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों की निंदा की. उन्होंने इस तरह के हमलों को जघन्य बताया. उन्होंने ये भी पूछा कि क्या वे (अल्पसंख्यक) इस देश के लोग नहीं हैं? आप देश को बचाने में सक्षम हैं, क्या आप कुछ परिवारों को नहीं बचा सकते हैं?
बेगम रोकेया विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ एक सेशन के दौरान प्रोफेसर यूनुस ने कहा कि आपको कहना चाहिए कि कोई भी उन्हें (अल्पसंख्यकों) नुकसान नहीं पहुंचा सकता. वे मेरे भाई हैं; हमने साथ मिलकर लड़ाई लड़ी है और हम साथ ही रहेंगे. उन्होंने छात्रों से सभी हिंदू, ईसाई और बौद्ध परिवारों को नुकसान से बचाने का आग्रह किया.