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India Daily

'मकर संक्रांति मनाई तो...', बांग्लादेश में हिंदुओं को जमात-ए-इस्लामी ने दी अंजाम भुगतने की खुली धमकी

बांग्लादेश में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा के बीच जमात-ए-इस्लामी ने हिंदुओं को मकर संक्रांति मनाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय में भय और असुरक्षा गहरा गई है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'मकर संक्रांति मनाई तो...', बांग्लादेश में हिंदुओं को जमात-ए-इस्लामी ने दी अंजाम भुगतने की खुली धमकी
Courtesy: social media

नई दिल्ली: बांग्लादेश में चुनावी माहौल के बीच धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं, पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. हिंसा, धमकियों और हमलों की कड़ी में अब हिंदुओं के प्रमुख त्योहार मकर संक्रांति को भी निशाना बनाया गया है. कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी ने इस पर्व से जुड़े उत्सवों को गैर-इस्लामी बताते हुए सख्त चेतावनी जारी की है. इससे हिंदू समुदाय के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया है.

मकर संक्रांति पर कट्टरपंथी चेतावनी

जमात-ए-इस्लामी ने मकर संक्रांति, जिसे बांग्लादेश में शक्रेन कहा जाता है, के दौरान सार्वजनिक उत्सवों पर रोक लगाने की धमकी दी है. संगठन का कहना है कि संगीत, पतंगबाजी और सामूहिक आयोजन इस्लामी मूल्यों के खिलाफ हैं. सोशल मीडिया पोस्ट और स्थानीय घोषणाओं के जरिए हिंदुओं को चेताया गया है कि उल्लंघन करने पर गंभीर अंजाम भुगतने होंगे.

हिंदू इलाकों में डर और सन्नाटा

इस चेतावनी के बाद ढाका, चटगांव और सिलहट जैसे शहरों के हिंदू बहुल इलाकों में भय का माहौल है. कई परिवारों ने इस बार शक्रेन को घरों तक सीमित रखने का फैसला किया है. समुदाय के लोगों का कहना है कि वे परंपराएं निभाना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता है और प्रशासन से कोई ठोस भरोसा नहीं मिला है.

शक्रेन की पुरानी परंपरा पर संकट

शक्रेन बांग्लादेश की सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है, जो हर साल 14 जनवरी को उत्साह के साथ मनाई जाती रही है. पतंगबाजी, पारंपरिक व्यंजन और लोक-संगीत इसकी पहचान रहे हैं. हालांकि, बीते कुछ वर्षों में कट्टरपंथी संगठनों ने इसे निशाना बनाना शुरू कर दिया है. पिछले साल भी इस त्योहार के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं.

हिंसा के बढ़ते मामले और डरावने आंकड़े

दिसंबर 2025 में छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद हालात और बिगड़े. इसके बाद हिंदू समुदाय के कई लोगों की हत्या, लूटपाट और आगजनी की घटनाएं दर्ज की गईं. बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, अकेले दिसंबर में सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाएं सामने आईं, जिनमें 10 हत्याएं शामिल हैं.

अंतरिम सरकार पर उठते सवाल

लगातार हो रही घटनाओं ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अल्पसंख्यक समुदाय का कहना है कि चेतावनियों और हमलों के बावजूद प्रशासन की प्रतिक्रिया कमजोर रही है. मकर संक्रांति से पहले हालात यह संकेत दे रहे हैं कि बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन चुकी है.