बांग्लादेश में एक बार फिर भारत विरोधी नारे सुनाई दिए हैं. इस बार प्रदर्शन का मुख्य निशाना प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार रही. शुक्रवार को राजधानी ढाका में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के संयोजक नाहिद इस्लाम के नेतृत्व में हजारों लोग सड़कों पर उतरे. प्रदर्शनकारियों ने महंगाई, बिजली संकट और ईंधन व गैस की कमी को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की. इस दौरान 'दिल्ली नहीं, ढाका' के नारे भी लगाए गए. नाहिद इस्लाम ने गृह मंत्री और ऊर्जा मंत्री के इस्तीफे की मांग की.
ढाका के नेशनल म्यूजियम के सामने आयोजित इस रैली में NCP के कई नेता शामिल हुए. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में नाहिद इस्लाम और पार्टी के अन्य नेताओं को 'दिल्ली नहीं, ढाका' का नारा लगाते सुना जा सकता है. इसके जवाब में वहां मौजूद हजारों लोगों ने 'ढाका, ढाका' के नारे लगाए.
इस प्रदर्शन में NCP सांसद हसनत अब्दुल्लाह भी शामिल हुए. वह पहले भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्यों को अलग-थलग करने और वहां अलगाववादी तत्वों को शरण देने जैसी धमकी दे चुके हैं. उनके इन बयानों पर भारत ने भी कड़ी नाराजगी जताई थी.
The people of Dhaka stood united, demanding the immediate resignation of the Home Affairs and Energy Ministers and the swift implementation of our four key demands. Change is coming. Inshallah, the people of Dhaka will soon be freed from the grip of terrorism, extortion, illegal occupation, and corrupt syndicates. #Bangladesh #NCP #Dhaka
— Nahid Islam (@NahidIslam_24) October 30, 2026
रैली को संबोधित करते हुए नाहिद इस्लाम ने भारत पर बांग्लादेश के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार बांग्लादेश को भारत की कथित साजिशों से बचाने में सक्षम नहीं है.
नाहिद ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर कथित हत्याओं का मुद्दा भी उठाया. इसके अलावा उन्होंने असम और पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के उत्पीड़न और दिल्ली में मस्जिदों को गिराने की कथित योजनाओं का जिक्र किया. हालांकि, अपने इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया.
नाहिद इस्लाम ने भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे के समझौते का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि अगर इस समझौते पर बांग्लादेश के हितों के मुताबिक दोबारा बातचीत नहीं हुई तो लोग फिर सड़कों पर उतरेंगे. उन्होंने साफ कहा कि इस बार बांग्लादेश अपने हिस्से के पानी को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा.
भारत और बांग्लादेश के बीच 30 साल का गंगा जल बंटवारा समझौता दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है. बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री ने 12 दिसंबर तक नया समझौता करने पर जोर दिया है.
यह समझौता पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज पर जनवरी से मई के बीच कम पानी के मौसम में गंगा के जल बंटवारे को नियंत्रित करता है. बांग्लादेश में गंगा को पद्मा नदी के नाम से जाना जाता है. देश की करीब एक-तिहाई आबादी अपनी आजीविका के लिए इस नदी और इससे जुड़े जल तंत्र पर निर्भर है.
बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से भारत विरोधी बयानबाजी में तेजी आई है. तत्कालीन अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में कई राजनीतिक और छात्र नेताओं ने भारत के खिलाफ तीखे बयान दिए थे.
नाहिद इस्लाम भी चुनाव से पहले भारत के कथित हस्तक्षेप के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन की अपील कर चुके हैं. वहीं, हसनत अब्दुल्लाह ने भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्यों को अलग-थलग करने और अलगाववादी संगठनों को मदद देने की धमकी दी थी. उन्होंने भारत के मुख्य हिस्से को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाले संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर का भी जिक्र किया था.
इसके अलावा जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख गुलाम आजम के बेटे और रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्लाहिल अमान आजमी ने भी भारत को लेकर विवादित बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि भारत के टुकड़े हुए बिना बांग्लादेश में स्थायी शांति संभव नहीं है.
हालांकि, फरवरी 2026 में तारिक रहमान के नेतृत्व में BNP की सरकार बनने के बाद इस तरह के भड़काऊ बयान कुछ कम हुए थे. लेकिन ताजा विरोध प्रदर्शनों में एक बार फिर भारत विरोधी नारे सुनाई दिए हैं.
बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से ऊर्जा संकट गहराया हुआ है. मध्य पूर्व में जारी उथल-पुथल के कारण ईंधन और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है. बांग्लादेश अपनी जरूरत का 90 फीसदी से अधिक तेल और करीब 30 फीसदी गैस आयात करता है.
देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती बढ़ने से आम लोगों के साथ उद्योगों को भी नुकसान हो रहा है. खासतौर पर कपड़ा कारखानों में उत्पादन प्रभावित हुआ है. आयातित गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में बांग्लादेश में महंगाई दर करीब 8.5 फीसदी बनी हुई है. खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं, जबकि मजदूरों की कमाई उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पाई है.
विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले करीब 21 लाख अतिरिक्त लोग गरीबी की स्थिति में पहुंच गए हैं. इसके अलावा खसरे से बच्चों की बढ़ती मौतों ने भी लोगों की नाराजगी बढ़ाई है. इन सभी वजहों से मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों में सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है.
NCP ने गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद तुकू के इस्तीफे की मांग की है. नाहिद इस्लाम ने चेतावनी दी कि अगर दोनों मंत्री पद नहीं छोड़ते हैं तो देशभर में विरोध मार्च निकाले जाएंगे. उन्होंने तारिक रहमान के आवास का घेराव करने की भी धमकी दी.
NCP सांसद अख्तर हुसैन ने LPG की कीमतों का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि कोलकाता में जिस गैस सिलेंडर की कीमत करीब 1,000 टका है, बांग्लादेश में उसके लिए लोगों को दोगुने से भी ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं. उन्होंने ऊर्जा मंत्री से सवाल किया कि अगर ईरान युद्ध का असर कोलकाता पर नहीं पड़ रहा तो बांग्लादेश में गैस इतनी महंगी क्यों है?
नाहिद इस्लाम ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि तारिक रहमान लंदन से बांग्लादेश में भ्रष्टाचार, लूटपाट, जबरन वसूली और हिंसा को बढ़ावा देने की योजना के साथ लौटे हैं.
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने पहले एक तानाशाह को सत्ता से हटाया था, लेकिन अब देश में एक नए तानाशाह का उदय हो रहा है. नाहिद ने दावा किया कि उनकी पार्टी पुराने और नए, दोनों तरह के तानाशाही शासन का विरोध करेगी.
शुक्रवार को हुआ प्रदर्शन मुख्य रूप से बांग्लादेश की घरेलू समस्याओं और तारिक रहमान सरकार की नीतियों के खिलाफ था. हालांकि, रैली में लगाए गए भारत विरोधी नारों से साफ है कि बांग्लादेश की राजनीति में भारत विरोधी बयानबाजी का मुद्दा अब भी प्रभावी बना हुआ है.