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बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर अटैक से ईरान का हो जाएगा 'द इंड'! तेहरान के साथ क्यों बढ़ने लगी रूस की चिंता?

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमला हुआ है. जिसके कारण रूस की चिंता भी बढ़ गई है. आइए जानते हैं कि ईरान के लिए कितना जरूरी है बुशहर प्लांट?

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Edited By: Shanu Sharma
बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर अटैक से ईरान का हो जाएगा 'द इंड'! तेहरान के साथ क्यों बढ़ने लगी रूस की चिंता?
Courtesy: X (@MarioNawfal)

ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट की मेट्रोलॉजी सर्विस बिल्डिंग के पास हमला हुआ. हालांकि इस हमले में मुख्य रिएक्टर को कोई क्षति नहीं पहुंची है. लेकिन इस हमले के बाद ईरान के अलावा रूस की भी चिंता बढ़ गई है. ऐसा क्यों है इसके बारे में हम विस्तार से समझेंगे. 

बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट फारस की खाड़ी के किनारे पर स्थित है. ईरान का यह एकमात्र सक्रिय न्यूक्लियर पावर प्लांट है, जो देश में ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करता है. इस क्षेत्र में 17 मार्च को प्रोजेक्टाइल गिरा, जिससे इलाके में खलबली मच गई.

कब और कैसे बना बुशहर प्लांट?

बता दें कि बुशहर प्लांट को 1970 के दशक में जर्मनी की कंपनी सीमेंस द्वारा बनाना शुरू किया गया था. लेकिन 1979 में ईरानी क्रांति के कारण जर्मन काम अधूरे रह गए. इसके बाद 1995 में ईरान ने रूस के साथ समझौता किया. रूस की कंपनी रोसाटॉम (एटॉमस्ट्रॉएक्सपोर्ट) ने इस प्लांट के निर्माण को पूरा किया. 1,000 मेगावाट की क्षमता वाला पहला रिएक्टर VVER-1000 को 2011 से पूर्ण रूप से परिचालन में लाया गया. वर्तमान में रूस के रोसाटॉम के तकनीशियन प्लांट का संचालन और रखरखाव संभाल रहे हैं. हालांकि इसका मालिक ईरान का एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन ऑफ ईरान ही है. लेकिन ईंधन आपूर्ति और संचालन में रूस की महत्वपूर्ण भूमिका है.

ईरान के लिए क्यों जरूरी है बुशहर प्लांट?

प्लांट रूस में निर्मित 4.5 प्रतिशत कम समृद्ध यूरेनियम से चलता है. रोसाटॉम उपयोग हो चुके ईंधन को भी वापस ले जाता है. जंग से पहले रोसाटॉम प्लांट के दूसरे और तीसरे यूनिट का निर्माण कर रहा था. इस प्लांट से लगभग 1,000 मेगावाट बिजली उत्पन्न किया जाता है, जो ईरान के लाखों घरों और औद्योगिक इकाइयों को ऊर्जा देता है. इसे ईरान एक सिविलियन न्यूक्लियर सुविधा कहता  है, लेकिन ईरान के समग्र परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेह के कारण दुनिया इस पर नजर रखे हुए है. ईरान का कहना है कि प्लांट में हथियार-ग्रेड सामग्री नहीं बनाई जाती, लेकिन फिर भी रूसी विशेषज्ञों की मौजूदगी के कारण इसकी संवेदनशील पर सवाल रहती है.

बुशहर प्लांट में क्या है रूस की भूमिका?

इस प्लांट पर रूस की भूमिका को समझें तो रूस ने न केवल प्लांट का निर्माण पूरा किया, बल्कि सैकड़ों रूसी इंजीनियर और तकनीशियन ही इसका संचालन कर रहे हैं. जिसकी वजह से रूस ने इस हमले के बाद रोसाटॉम के सीईओ एलेक्सी लिखाचेव ने इसकी कड़ी निंदा की. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया और कहा कि परिचालनरत न्यूक्लियर सुविधा पर हमला खतरनाक मिसाल है. प्लांट के आसपास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. लेकिन कुछ स्टाफ वहां से निकलने की तैयारी भी कर रहे हैं. रूस ने इस हमले की चिंता जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे हमलों से क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो रही है.