Israel-Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को कई बार चेतावनी दी थी. उन्होंने ईरान को साफ तौर पर धमकाया था. धमकी में ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अगर समझौता नहीं किया, तो उनकी खैर नहीं. अब ट्रंप अपनी बात पर कायाम रहे और उन्होंने इजरायल के साथ ईरान पर धमाकों की बारिश कर दी. ट्रंप ने 10 से 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था. यह हमला राजधानी तेहरान में हुआ था. अब ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच पूरे दुनिया में विश्व युद्ध की गूंज सुनाई दे रही है.
इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपने नए अभियान का नाम 'लियोनस् रोर' रखा है. यह हमला अमेरिका और इजराइल का जॉइंट मिलिट्री एक्शन है. ईरान पर हमले से बहुत पहले अमेरिका ने ईरान के चारों तरफ अपनी सैन्य स्थिति मजबूत कर ली थी. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए करीब 400 मिसाइलें दाग दी.
ट्रंप द्वारा तय की गई 10 दिन की समय सीमा जैसे-जैसे समाप्त आने लगी, वैसे ही चिंताएं चरम पर पहुंच गई. रूस, यूरोपीय सरकारों और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने ईरान को सावधानी बरतने को कहा.
गौरतलब है कि 2025 के ईरान-इजराइल युद्ध और ईरान समर्थित समूहों के साथ कई झड़पों के बाद भी तनाव में चल रहे इजराइली नेताओं ने जनवरी में ही ईरान को बार-बार चेतावनी दिया था कि वे उसके परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को अनियंत्रित रूप से बढ़ने नहीं देंगे.
चेतावनी के बावजूद ईरान संवेदनशील परमाणु और मिसाइल संबंधी गतिविधियां जारी रखे हुए है. बार-बार चेतावनी के बावजूद न मानने के बाद इजरायल-अमेरिका ने शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान पर हमला किया. जिसके बाद से मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है.
हाल की घटनाओं के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया. ये है 5 मुख्य कारण:
परमाणु कार्यक्रम को रोकना: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमले का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकना है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ताएं विफल हो गईं. ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों को जारी रखा, जिसे अमेरिका और इजराइल एक बड़ा खतरा मानते हैं.
बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम: ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलें अमेरिका और इजराइल को धमकी दे रही हैं. ट्रंप ने कहा कि हमले में ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री को नष्ट किया जाएगा.
प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन: ईरान हमास, हिजबुल्लाह जैसे समूहों को समर्थन देता है, जो इजराइल के खिलाफ हैं. इजराइल ने इसे अस्तित्व का खतरा बताया.
ऐतिहासिक विवाद: 1979 के अमेरिकी दूतावास बंधक संकट, अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप, और अन्य हमलों को ट्रंप ने कारण बताया.
शासन परिवर्तन: ट्रंप ने ईरानियों से अपील की कि वे अपनी सरकार को उखाड़ फेंकें, और हमला एक पूर्व-निवारक कार्रवाई के रूप में किया गया.