वियतनाम की 87 वर्षीय गुयेन की कहानी इन दिनों लोगों का ध्यान खींच रही है. बताया जाता है कि जब वह करीब 19 साल की थीं, तब वह गंभीर बीमारी और तेज सिरदर्द से परेशान रहती थीं. इसी दौरान उनके बाल बढ़ने लगे और उनकी तबीयत में सुधार हुआ. इसके बाद उनके मन में यह डर बैठ गया कि अगर उन्होंने बाल कटवाए या धोए, तो बीमारी और सिरदर्द फिर से लौट सकते हैं.
इस डर के कारण उन्होंने अपने बाल कटवाना और धोना बंद कर दिया. समय के साथ उनके बाल आपस में उलझते गए और एक बड़ी गांठ जैसी आकृति में बदल गए. बताया जाता है कि उनके बालों की लंबाई करीब 6 मीटर तक पहुंच गई. कई वर्षों तक बालों को न काटने के कारण उनका वजन और आकार इतना बढ़ गया कि उनकी सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित होने लगीं.
امرأة فيتناميه تدعى نغوين(87 عام) عندما كان عمرها 19 عام اصيبت بمرض شديد وصداع قوي وعندما نما شعرها تحسنت حالتها فقررت عدم قصة او غسله خوفا من عودة الالم شعرها متشابك وكأنه ثعبان كبير (بطول 6 امتار) ومع مرور السنين منعها من الحركة وتحتاج للعناية والمساعده، وحتى رفضت الزواج بسببه عجيب ما يفعله الخوف بعقل الانسان، فاتتها امور كثيرة في حياتها وعاشت المسكينه اسيرة لمعتقداتها
— Saif (@diol2n) October 11, 2026
रिपोर्ट के अनुसार लंबे और भारी बालों के कारण महिला को चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होती थी. उन्हें कई कामों के लिए दूसरे लोगों की मदद और देखभाल की जरूरत पड़ने लगी. यानी जिस चीज को उन्होंने कभी बीमारी से बचने का जरिया माना था, वही आगे चलकर उनके लिए बड़ी परेशानी बन गई.
बताया जाता है कि बालों को लेकर बनी इस धारणा का असर उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ा. उन्होंने शादी करने से भी दूरी बनाए रखी. इस तरह बालों से जुड़ा डर उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण फैसलों को प्रभावित करता चला गया. यह कहानी डर और गहरी मान्यताओं के इंसानी जीवन पर पड़ने वाले असर को दिखाती है.
हालांकि, इस घटना से जुड़े सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है. खास तौर पर बीमारी और सिरदर्द का बाल बढ़ने के बाद ठीक होना वैज्ञानिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं है. इसलिए इस घटना को चिकित्सा संबंधी प्रमाणित तथ्य के बजाय एक रिपोर्टेड व्यक्तिगत अनुभव के रूप में देखना चाहिए.