कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विपक्ष के विरोध के बीच केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. सोमवार को उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कविता ‘जनतंत्र का जन्म’ की पंक्तियां सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा कीं. इनमें सबसे चर्चित पंक्ति ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ भी शामिल थी.
Poem of the Day (आज की कविता): As Ramdhari Singh 'Dinkar' (रामधारी सिंह 'दिनकर') wrote in his iconic poem "Janatantra Ka Janma" (जनतंत्र का जन्म / “The Birth of Democracy”): https://t.co/B8ptGWSvts
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) October 12, 2026Also Read
थरूर ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘यह सरकार जाएगी.’ उनके इस बयान को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रुख के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, थरूर ने अपनी कविता वाली पोस्ट में किसी व्यक्ति या संस्था का नाम लेकर यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका निशाना कौन है.
“This government will go” “यह सरकार जाएगी” @incIndia @RahulGandhi
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) October 10, 2026
थरूर की पोस्ट ऐसे समय आई, जब विपक्षी गठबंधन INDIA के नेता दिल्ली में मार्च की तैयारी कर रहे थे. विपक्ष का यह विरोध 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस हिंसा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं द्वारा छात्रों तथा महिलाओं पर हमले के आरोपों से जुड़ा है.
राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पिछले एक सप्ताह से विरोध प्रदर्शन कर रही है. हालांकि, इस दौरान थरूर आंदोलन में सक्रिय रूप से नजर नहीं आए थे. ऐसे में उनकी ताजा टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
शशि थरूर कई मुद्दों पर BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के रुख का समर्थन कर चुके हैं. इनमें मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले सैन्य टकराव के दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सरकार के पक्ष को सामने रखना भी शामिल है.
थरूर ने शनिवार की कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए एक्स पर लिखा था, ‘मोदीजी, आज के युवाओं को वही सबक सिखाने के लिए धन्यवाद!’ उनकी ताजा टिप्पणियों ने विपक्ष के विरोध के बीच उनकी राजनीतिक भूमिका को फिर चर्चा में ला दिया है.
रामधारी सिंह दिनकर की कविता ‘जनतंत्र का जन्म’ जनता की ताकत और लोकतंत्र में लोगों की सर्वोच्च भूमिका को रेखांकित करती है. इसका संदेश है कि सत्ता का असली आधार जनता होती है. थरूर की पोस्ट को मौजूदा राजनीतिक टकराव के संदर्भ में इसी विचार से जोड़कर देखा जा रहा है.
इससे पहले लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ आंदोलन के दौरान दिनकर की इसी कविता की पंक्तियों का इस्तेमाल किया था. थरूर द्वारा प्रसिद्ध हिंदी कविता का चयन भी चर्चा में रहा.
थरूर ने रविवार को माकपा सांसद जॉन ब्रिटास के साथ दिल्ली पुलिस के कथित व्यवहार की भी निंदा की. उन्होंने एक्स पर लिखा कि ब्रिटास एक सम्मानित सांसद हैं और विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सक्रिय सदस्य हैं. समिति के अध्यक्ष के तौर पर थरूर ने घटना की आलोचना करते हुए दिल्ली पुलिस से जांच करने की मांग की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पुलिस व्यवस्था के कुछ मानक होते हैं, जिनका पालन किया जाना चाहिए.
10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई विपक्षी नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्रियों, छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था. इनमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार शामिल थे.
इसके अलावा माकपा महासचिव एमए बेबी, राजद सांसद मनोज झा और भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य भी हिरासत में लिए गए नेताओं में शामिल थे.
CJP के नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था. 11 अक्टूबर को अदालत के आदेश के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया था.
थरूर की कविता, सरकार पर उनकी टिप्पणी और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना ऐसे समय आई है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का अभियान तेज हो रहा है. हालांकि, उन्होंने कविता के जरिए किसी को सीधे निशाना नहीं बनाया, लेकिन उनकी पोस्ट को मौजूदा राजनीतिक विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है.