देश में खुदरा महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई. नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) सीरीज में यह पहली बार 5 प्रतिशत के पार पहुंची है. 12 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में महंगाई दर 4.83 प्रतिशत थी. मार्च के बाद लगातार छठे महीने इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई.
खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर अगस्त के 5.97 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.74 प्रतिशत हो गई. प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर 108.09 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि अगस्त में यह दर 48.78 प्रतिशत थी. लहसुन की महंगाई 54.62 प्रतिशत और नींबू की 36.41 प्रतिशत रही. हालांकि, आलू के दाम में 11.50 प्रतिशत और टमाटर में 8.62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
सितंबर में ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 6.08 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 5.24 प्रतिशत थी. शहरी क्षेत्रों में यह दर 4.31 प्रतिशत से बढ़कर 4.88 प्रतिशत पहुंच गई. राज्यों में तमिलनाडु 6.81 प्रतिशत के साथ सबसे आगे रहा. इसके बाद ओडिशा में 6.70 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 6.68 प्रतिशत, तेलंगाना में 6.64 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 6.29 प्रतिशत महंगाई दर्ज की गई.
व्यक्तिगत देखभाल और विविध वस्तुओं एवं सेवाओं की महंगाई दर 13.75 प्रतिशत रही. रेस्तरां और आवास सेवाओं की कीमतों में 9.36 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. परिवहन महंगाई 5.01 प्रतिशत रही. वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं में 1.40 प्रतिशत, आवास एवं उपयोगिता सेवाओं में 2.74 प्रतिशत और शिक्षा सेवाओं में 3.94 प्रतिशत महंगाई दर्ज की गई.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का महंगाई लक्ष्य 4 प्रतिशत है, जबकि इसकी स्वीकार्य सीमा 2 से 6 प्रतिशत है. सितंबर की दर लक्ष्य से ऊपर है, लेकिन निर्धारित सीमा के भीतर बनी हुई है. लगातार बढ़ती महंगाई के बीच RBI के आगामी फैसलों पर नजर रहेगी. केंद्रीय बैंक की अगली मौद्रिक नीति बैठक दिसंबर में होने की उम्मीद है.