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India Daily

U-Visa पाने के लिए 11 भारतीयों ने अमेरिका में रची नकली लूट की साजिश, हुए गिरफ्तार

अमेरिका में 11 भारतीय लोगों को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया. इन पर स्पेशल इमिग्रेशन बेनिफिट गलत तरह से पाने का आरोप लगाया गया है. 

Shilpa Shrivastava
U-Visa पाने के लिए 11 भारतीयों ने अमेरिका में रची नकली लूट की साजिश, हुए गिरफ्तार
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: अमेरिका में भारत के ग्यारह लोगों को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. इन सभी पर स्पेशल इमिग्रेशन बेनिफिट गलत तरह से पाने का आरोप लगाया गया है. मैसाचुसेट्स के बोस्टन में फेडरल जांचकर्ताओं का कहना है कि इस ग्रुप ने करीब 6 फेक रॉबरी को अंजाम दिया. ये रॉबरी कन्विनियन्स स्टोर, लिकर शॉप्स और फास्ट-फूड रेस्तरां जैसी जगहों पर हुईं. इसका मकसद दुकान के कर्मचारियों को क्राइम विक्टिम दिखाना था, जिससे उन्हें U-Visa के लिए आवेदन करने में मदद मिले.

बता दें कि U-Visa एक स्पेशल वीजा होता है, जो अमेरिका उन लोगों को देता है जो गंभीर अपराधों का शिकार होते हैं और पुलिस को जांच में मदद करते हैं. यह उन्हें देश में कानूनी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है. इसके बाद वो परमानेंट रेसिडेंसी के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं.

कुछ ऐसा होता है वेल एग्जीक्यूटेड प्लान:

अधिकारियों ने बताया कि यह एक वेल एग्जीक्यूटेड प्लान था. इसमें एक व्यक्ति ने फेक रॉबर की भूमिका निभाई. बंदूक जैसी दिखने वाली कोई चीज हाथ में लेकर वह दुकान में घुसता है, कैश रजिस्टर से पैसे निकालता है और फिर भाग जाता है. यह पूरा मामला सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड भी हो जाता है, जिससे वो असली लगे. जैसे ही डकैती पूरी हो जाती है, दुकान के मौजूद लोग पांच मिनट या और कुछ देर इंताजर करते हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है, जिससे नकली रॉबर्स को भागने का समय मिले और कहानी ज्यादा रियल लगे. 

प्लान में शामिल होने के लिए दिए जाते हैं लोगों को पैसे:

जो लोग मामले की जांच कर रहे हैं उनका कहना है कि इस योजना में शामिल होने के लिए लोगों को पैसे दिए जाते हैं. जिन के साथ यह घटना प्लान की जाती है उन्हें यह दिखाना होता है कि वो विक्टिम हैं, जिससे वो U-Visa के लिए आवेदन कर सकें. इसका मुख्य आयोजक पैसे इकट्ठा करता था और उसका कुछ हिस्सा उन दुकान मालिकों के साथ बांटता था जो अपनी दुकानों में फेक रॉबरी कराने के लिए राजी होते हैं. 

ये हैं आरोपी:

इन आरोपियों में जितेंद्र कुमार पटेल, महेशकुमार पटेल, संजयकुमार पटेल, अमिताबेन पटेल, संगीताबेन पटेल और मितुल पटेल को मैसाचुसेट्स में गिरफ्तार किया गया. इन्हें बोस्टन की फेडरल अदालत में पेश किया गया और रिहा कर दिया गया. इनके अलावा रमेशभाई पटेल, रोनक कुमार पटेल, सोनल पटेल और मिंकेश पटेल को केंटकी को मिसौरी और ओहियो में गिरफ्तार किया गया. इन्हें बोस्टन की अदालत में पेश किया जाएगा. सभी आरोपियों को न्यायाधीश के सामने पेश किया गया है. बोस्टन में और भी अदालती सुनवाईयां होंगी.

क्या है इस आरोप की सजा:

अगर लोगों को वीजा धोखाधड़ी की साजिश का दोषी पाया जाता है, तो हर व्यक्ति को 5 साल तक की जेल, रिहाई के बाद 3 साल तक निगरानी और $250,000 तक का जुर्माना हो सकता है. इस मामले की जांच FBI, इमिग्रेशन अधिकारियों और अलग-अलग राज्यों की पुलिस ने मिलकर की. अधिकारियों का कहना है कि अभी ये केवल आरोप हैं. अमेरिका की कानूनी व्यवस्था में, जब तक अदालत में किसी का दोष साबित नहीं हो जाता, तब तक उसे निर्दोष ही माना जाता है.