नई दिल्ली: अमेरिका के विदेश विभाग ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई और ईरान के कई अन्य टॉप अधिकारियों को लेकर इनाम घोषित किया है. जानकारी के मुताबिक, 10 मिलियन डॉलर (92,60,48,500 रुपये) तक का इनाम इनकी जानकारी देने वाले को दिया जाएगा. यह प्रस्ताव रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस प्रोग्राम के तहत दिया जा रहा है. इसका इस्तेमाल अमेरिकी सरकार उन लोगों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए करती है, जिन्हें वह अपने लिए खतरा मानती है. इसकी जानकारी यूएस के विदेश विभाग ने एक्स पोस्ट के जरिए दी है.
एक्स पर जो पोस्टर पोस्ट किया गया है, उनमें इन व्यक्तियों को ईरानी आतंकवादी नेता कहा गया है. मोजतबा खामेनेई सुप्रीम लीड अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं. इनकी मौत युद्ध के शुरुआती दिनों में ही हो गई थी. पोस्टर के अनुसार इनके बारे में जो भी जानकारी कोई व्यक्ति उपलब्ध कराएगा, उसे 10 मिलियन डॉलर तक का इनाम मिल सकता है.
सूचना में कहा गया है कि ये नेता ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अलग-अलग हिस्सों को कंट्रोल करते हैं. अमेरिका ने दावा किया है कि IRGC दुनिया भर के कई देशों में आतंकवादी एक्टिविटीज का प्लान बनाता है और उन्हें अंजाम भी देता है. इस पोस्ट में किन-किन लोगों के नाम शामिल हैं, चलिए जानते हैं.
मोजतबा खामेनेई: सर्वोच्च नेता
खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब
उप-चीफ ऑफ स्टाफ अली असगर हेजाजी
मेजर जनरल याह्या रहीम सफवी
गृह मंत्री ब्रिगेडियर जनरल एस्कंदर मोमेनी
सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी
Got information on these Iranian terrorist leaders?
— Rewards for Justice (@RFJ_USA) March 13, 2026
Send us a tip. It could make you eligible for a reward and relocation. pic.twitter.com/y7avkqdGWw
अमेरिकी सरकार के अनुसार, ये लोग IRGC और उसके अभियानों की देखरेख में मदद करते हैं. रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस प्रोग्राम का मैनेजमेंट विदेश विभाग की डिप्लोमैटिक सिक्योरिटी सर्विस द्वारा किया जाता है. जिन लोगों के पास जानकारी है, वे एन्क्रिप्टेड ऐप्स या Tor नेटवर्क पर एक सुरक्षित चैनल के जरिए कॉन्टैक्ट कर सकते हैं. इससे जो लोग जानकारी भेज रहे हैं, उनकी जानकारी गोपनीय रहेगी.
बता दें कि यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत ज्यादा बढ़ चुका है. अमेरिकी अधिकारी ईरान के सुरक्षा और खुफिया समूहों पर और ज्यादा दबाव डाल रहा है. अमेरिका उन नेटवर्कों को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, जिनके बारे में उसका मानना है कि वे आतंकवाद और क्षेत्रीय संघर्षों को बढ़ावा देते हैं.