नई दिल्ली: देश में वन नेशन, वन इलेक्शन की चर्चा तेज हो चली है. तमाम चर्चाओं और कयासों के बीच केंद्र सरकार ने एक समिति का गठन किया है. सियासी गलियारों में सुगबुगाहट है कि मोदी सरकार संसद के विशेष सत्र के दौरान वन नेशन, वन इलेक्शन का बिल ला सकती है. सरकार के इस कदम का विपक्ष की तमाम पार्टियों ने कड़ा विरोध जताया है. तो वहीं क्षेत्रीय दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने सरकार के इस कदम का पुरजोर समर्थन किया है.
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने वन नेशन, वन इलेक्शन का किया समर्थन
वाईएसआर महासचिव और राज्यसभा सांसद वी विजयसाई रेड्डी ने ट्वीट करते हुए कहा कि "एक राष्ट्र, एक चुनाव की अवधारणा के कई सकारात्मक पहलू हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इससे हजारों करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. यह अवधारणा नई नहीं है. इससे पहले 1951-52, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हो चुके हैं. आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने के कारण इसका हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है"
The concept of One Nation-One Election has many positives most of all it saves thousands of crores. The concept is not new. India had simultaneous General and State elections in 1951-52, 1957, 1962 & 1967. For us in AP, it does not affect us as the Lok Sabha and Assembly…
— Vijayasai Reddy V (@VSReddy_MP) September 2, 2023
सरकार ने गठित की आठ सदस्यीय कमेटी
देश में वन नेशन, वन इलेक्शन कमेटी को लेकर केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति बनाई गई है. इस कमेटी में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कमेटी के चेयरमैन होगे. वहीं समिति में सदस्य गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी, पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद, वित्त आयोग के पूर्व चेयरमैन एनके सिंह, वरिष्ठ संविधानविद सुभाष सिंह कश्यप और देश के जाने माने वकील हरीश साल्वे और पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त संजय कोठारी होंगे.
यह भी पढ़ें: BJP ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए दिनेश शर्मा को बनाया उम्मीदवार, योगी कैबिनेट में नहीं मिली थी जगह