रूस और भारत के रिश्ते पुराने हैं. दोनों देश के बीच हर मौकों पर एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की जमकर तारीफ की और रूस के साथ ऊर्जा सहयोग को लेकर भारत पर डाले जा रहे दबाव की आलोचना की. बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लावरोव ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल की बैठक के बारे में यूक्रेन की टिप्पणियों की निंदा की.
लावरोव ने कहा कि मुझे लगता है कि भारत एक महान शक्ति है जो अपने राष्ट्रीय हितों को खुद तय करता है, अपने राष्ट्रीय हितों को निर्धारित करता है और अपने साझेदारों को खुद चुनता है. और हम जानते हैं कि भारत पर अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में बहुत ज़्यादा दबाव है, जो पूरी तरह से अनुचित है. लावरोव प्रधानमंत्री मोदी की हालिया मास्को यात्रा और रूस के साथ ऊर्जा सहयोग पर भारत को हुए विरोध के बारे में पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे.
जुलाई में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता रूस द्वारा की जा रही है, तथा लावरोव मास्को की अध्यक्षता में परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करने के लिए न्यूयॉर्क में हैं. प्रधानमंत्री मोदी 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पुतिन के निमंत्रण पर 8-9 जुलाई को रूस की आधिकारिक यात्रा पर गए. यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत के बाद से यह मोदी की पहली रूस यात्रा थी.
भारत ने 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की निंदा नहीं की है तथा लगातार वार्ता और कूटनीति के माध्यम से संघर्ष को हल करने की वकालत की है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने पीएम मोदी की मॉस्को यात्रा की आलोचना करते हुए एक्स पर एक पोस्ट में कहा, एक रूसी मिसाइल ने यूक्रेन के सबसे बड़े बच्चों के अस्पताल पर हमला किया, जिसमें युवा कैंसर रोगी शामिल थे. मलबे के नीचे कई लोग दबे हुए थे. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता को मॉस्को में ऐसे दिन दुनिया के सबसे खूनी अपराधी को गले लगाते देखना एक बहुत बड़ी निराशा और शांति प्रयासों के लिए एक विनाशकारी झटका है.
भारत ने दिल्ली में यूक्रेन के दूतावास को ज़ेलेंस्की की टिप्पणी पर अपनी नाराज़गी से अवगत कराया. लावरोव ने बताया कि यूक्रेनी राजदूत को तलब किया गया और भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बात पर चर्चा की कि उन्हें कैसे व्यवहार करना चाहिए.
जयशंकर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पश्चिमी देशों ने भी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से गैस और तेल की खरीद बढ़ा दी है. जयशंकर ने कहा कि भारत खुद तय करेगा कि उसे किस तरह व्यापार करना है और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कैसे करनी है, लेकिन तथ्य यह है कि पश्चिम चीन, भारत जैसी शक्तियों के प्रति अपनी नाराजगी प्रदर्शित कर रहा है, यह उनकी विद्वता की कमी, कूटनीति में भाग लेने में उनकी अक्षमता को दर्शाता है, और राजनीतिक विश्लेषकों की विफलता को भी दर्शाता है.
जयशंकर ने रूस से भारत की तेल खरीद का बचाव करते हुए इस बात पर बल दिया कि भारतीय लोगों के हितों को प्राथमिकता देना उनका कर्तव्य है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें अन्य देशों के कार्यों की कीमत न चुकानी पड़े. उन्होंने कहा, ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ़ एक देश से तेल खरीदते हैं. हम कई स्रोतों से तेल खरीदते हैं, लेकिन भारतीय लोगों के हित में यह समझदारी वाली नीति है कि हम वहीं जाएं जहां हमें सबसे अच्छा सौदा मिले और हम यही करने की कोशिश कर रहे हैं.