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G7 समिट में बार-बार क्यों बुलाया जाता है भारत, मजबूरी या जरूरी? ये है इनसाइड स्टोरी

जिन देशों के पास दुनिया की 40 फीसदी जीडीपी है, उन्हीं देशों की एक बैठक, इटली के फसानो शहर में हो रही है. जॉर्जिया मेलोनी इस बैठक की मेजबान हैं और दुनियाभर के दिग्गज इसमें शामिल होने पहुंचे हैं. इन देशों का संगठन, G7 कहलाता है. बैठक का एजेंडा रूस-यूक्रेन वॉर और इजरायल-हमास के बीच भड़की जंग है. भारत G7 का सदस्य देश नहीं है, फिर भी क्यों बार-बार बुलाया जाता है, आइए जानते हैं इसकी कहानी.

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Narendra Modi Giorgia Meloni
Courtesy: Social Media

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 की बैठक में शामिल होने के लिए इटली गए हैं. इटली के अपुलिया में जी7 का 50वां शिखर सम्मेलन हो रहा है. 13 जून को इन देशों की बैठक शुरू हुई है. 15 जून तक यह बैठक चलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने शामिल होने का न्योता दिया था. भारत, G7 का सदस्य देश नहीं है, फिर भी बार-बार भारत को इस बैठक में बुलाया जाता है. 

साल 1975 में बने इस संगठन में दुनिया के 7 अमीर देश शामिल हैं. अमेरिका, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और कनाडा शामिल हैं. ये देश, दुनिया के ज्वलंत मुद्दो पर चर्चा करते हैं. इजरायल और हमास के बीच जंग छिड़ी है. रूस और यूक्रेन उलझे हुए हैं. इन मुद्दों पर जी7 बैठक के दौरान चर्चा होगी. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, शरणार्थी संकट, आतंकवाद, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर चर्चा होगी. 

भारत ने अब तक 10 बार इस बैठक में हिस्सा लिया है. साल 2003 से ही भारत के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल होते रहे हैं. यह 11वीं बार है, जब कोई हिंदुस्तानी प्रतिनिधि जी7 बैठक में शामिल होगा. दुनिया में बढ़ रहे भारत के दबदबे के चलते, बार-बार भारत को इस बैठक में शामिल होने का न्योता भेजा जाता है. आइए जानते हैं यह बैठक हमारे लिए क्यों अहम है.

बार-बार भारत क्यों बुलाया जाता है, वहज जान लीजिए

- भारत का दबदबा दुनिया में बढ़ रहा है. चीन के खिलाफ भारत, दुनिया की इकलौती आशा है, जो न केवल सामरिक रूप से मजबूत है, बल्कि निवेश के लिए भी बड़े अवसरों वाला देश है.

- भारत का असर, एशिया के कई देशों पर है. रूस और इजरायल जैसे देश, भारत के फैसलों का सम्मान करते हैं. ऐसे वक्त में जब ये देश, युद्ध में बुरी तरह से लिप्त हैं, दुनिया को ये आशा है कि भारत के हस्तपक्षेप के बाद, ये देश, शांति वार्ता की ओर कदम बढ़ा सकते हैं. 

- चीन और अमेरिका के रिश्ते कभी बेहतर नहीं रहे हैं. चीन, भारत को बढ़ावा देना चाहता है जिससे चीन में ही सारे आर्थिक विकास का केंद्रीयकरण न हो. यूरोपीय देश भी ऐसा सोचते हैं. चीन से मुकाबला करने के लिए भारत के बड़ा देश, एशिया में कोई भी नहीं है. 

- भारत, विकासशील देश है और तमाम चुनौतियों के बाद भी अपने आर्थिक विकास को संतुलित बनाकर आगे बढ़ रहा है. जिस भारत को दुनिया तीसरी दुनिया कहती थी, उसकी नीतियों के बारे में दुनिया के कई देश जानना चाहते हैं. जी7 वही मंच है, जहां से दुनिया से अहम संदेश ले सकती है.

- ग्लोबल साउथ में भारत का दबदबा है. भारत वैश्विक नियमों का सम्मान करता है और संयुक्त राष्ट्र की नीतियों का पालन करता है. भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य बनाने को लेकर कवायद होती रही है. जानकारों का कहना है कि आज नहीं तो कल, भारत UNSC का स्थाई सदस्य होगा. भारत के पास वे सारे संसाधन हैं, जो इसकी स्थायी सदस्यता के लिए अनिवार्य हैं. दुनिया जानती है भारत भविष्य है और इससे जुड़े रहना जरूरी है.

- भारत जी7 देशों का अहम व्यापारिक भागीदार भी है. कनाडा से लेकर अमेरिका तक, हर देश के साथ भारत के बेहतर संबंध है. भारत को ये देश, अवसर के तौर पर देखते हैं.

भारत G7 में किन मुद्दों पर करेगा बात?

भारत यूक्रेन और रूस की जंग पर बात करेगा. भारत का कहना है कि युद्ध संघर्ष को रोकने का सबसे सही तरीका बातचीत है. विदेश सचिव विनय क्वात्रा यह साफ कर चुके हैं कि बातचीत कूटनीति का सबसे अच्छा विकल्प है. भारत इजरायल और हमास पर भी अपना पक्ष रख सकता है. 

भारत के अलावा और कौन से देश लेंगे हिस्सा?

भारत के अलावा इस बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, जापान के पीएम फुमिया किशिदा, ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक, यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला फॉन, अध्यक्ष चार्ल्स माइकल, जर्मनी के चांसलर ओलाफ शूल्तज, पोप फ्रांसिस भी इस बैठक में शामिल हो रहे हैं.

ये है G7 का एजेंडा

- अफ्रीका, जलवायु परिवर्तन और विकास
- मध्य पूर्व
- यूक्रेन
- माइग्रेशन
- इंडो-पेसिफिक और आर्थिक सुरक्षा
- अफ्रीका, भूमध्य सागर, AI और ऊर्जा पर चर्चा