नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक टैरिफ को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई फोन वार्ता ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. यह बातचीत ऐसे संवेदनशील समय में हुई है जब अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर भारी शुल्क लगाने की घोषणा की है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस संवाद की पुष्टि की है. इस बातचीत को दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने की एक कोशिश माना जा रहा है.
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर इस उच्चस्तरीय संपर्क की जानकारी साझा की है. हालांकि बातचीत के विशिष्ट विवरण अभी गोपनीय रखे गए हैं, लेकिन इसे टैरिफ विवाद के बाद दोनों नेताओं के बीच तीसरी बड़ी फोन वार्ता माना जा रहा है. यह संवाद रणनीतिक साझेदारी में आई गिरावट को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे पहले पिछले साल दिसंबर में भी दोनों के बीच टैरिफ के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई थी.
President Trump just spoke with Prime Minister Modi. STAY TUNED… pic.twitter.com/IFcxrJj04m
— Ambassador Sergio Gor (@USAmbIndia) February 2, 2026Also Read
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फोन कॉल उसी दिन हुआ जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर वाशिंगटन की अपनी तीन दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए. जयशंकर वहां 'अहम खनिज मंत्रिस्तरीय' बैठक में भाग लेंगे और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. यह यात्रा दोनों देशों के बीच आपूर्ति शृंखला के लचीलेपन और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के अवसर के तौर पर देखी जा रही है. जयशंकर की यह यात्रा संबंधों में सुधार का बड़ा अवसर मानी जा रही है.
दोनों देशों के रिश्तों में हालिया तनाव की मुख्य वजह राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाया गया 50 प्रतिशत का भारी शुल्क है. इसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से लगाया गया 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है. व्यापारिक बाधाओं के अलावा, आव्रजन नीति और भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव से जुड़े पुराने दावों ने भी कूटनीतिक दूरियां बढ़ा दी हैं. अब जयशंकर की बैठकों का उद्देश्य इन सभी पेचीदा मुद्दों पर गहन चर्चा करना है.
मौजूदा विवादों के बावजूद, दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. वाशिंगटन में होने वाली बैठक का मुख्य उद्देश्य खनिज आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को सुनिश्चित करना है. भारत और अमेरिका प्रशासन के वरिष्ठ सदस्यों के बीच होने वाली ये बैठकें भविष्य की कूटनीति की दिशा तय करेंगी. इससे दोनों रणनीतिक साझेदारों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को एक नया मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है.
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच इस निरंतर संपर्क को उच्चस्तरीय कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि कई चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं, लेकिन संवाद के रास्ते खुले होना एक सकारात्मक संकेत है. जानकारों का मानना है कि इस तरह की फोन वार्ता व्यापारिक तनाव को कम करने और आपसी विश्वास बहाली में सहायक हो सकती है. पूरी दुनिया की नजरें अब जयशंकर की बैठकों से निकलने वाले ठोस और सकारात्मक परिणामों पर टिकी हुई हैं.