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'मुझे आज यादों में खो जाने दीजिए...', ममता बनर्जी का छलका दर्द, ट्वीट कर कही ये बात

सीएम ममता बनर्जी ने लिखा, “मुझे इस बात पर गर्व है कि बाद में, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में भी, मैंने इन परियोजनाओं के काम सक्रिय रूप से पूरा किया.” उन्होंने मुफ्त जमीन, सड़क निर्माण, विस्थापित लोगों के पुनर्वास और बाधाओं को दूर करने की व्यवस्था की.

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Edited By: Mayank Tiwari
'मुझे आज यादों में खो जाने दीजिए...', ममता बनर्जी का छलका दर्द, ट्वीट कर कही ये बात
Courtesy: X@MamataOfficial

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पश्चिम बंगाल पहुंचे, जहां वे कोलकाता मेट्रो की तीन नई परियोजनाओं के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेंगे. इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने रेल मंत्री कार्यकाल की यादें ताजा करते हुए एक भावुक पोस्ट शेयर की. अपनी पोस्ट का हेडर “आज मुझे थोड़ी यादों में खो जाने दीजिए” देते हुए उन्होंने कोलकाता मेट्रो के विकास में अपनी भूमिका को रेखांकित किया. 

सीएम ममता बनर्जी ने लिखा, “भारत का रेल मंत्री होने के नाते, मुझे कोलकाता में कई मेट्रो रेल कॉरिडोर की योजना बनाने और उन्हें मंजूरी देने का सौभाग्य मिला. मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि इस शहर के कई इलाकों (जैसे-जोका, बेहाला, तारतला, गरिया, नोआपाड़ा, दक्षिणेश्वर, हवाई अड्डा, दमदम, सेक्टर फाइव, आदि) को एक महानगरीय मेट्रो ग्रिड से जोड़ने के लिए, इसका खाका तैयार करने, जरूरी धन की व्यवस्था करने, और समय पर काम शुरू करने सहित, सभी काम करने का सौभाग्य मुझे मिला.” उन्होंने बताया कि उन्होंने कोलकाता में मेट्रो रेलवे के लिए एक अलग जोन बनाया, जो देश के 20 जोनों के अतिरिक्त था.

मेट्रो परियोजनाओं का उद्घाटन

सीएम ममता बनर्जी ने अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा, “टॉलीगंज-गरिया, दमदम-गरिया, दक्षिणेश्वर-दमदम, सॉल्ट लेक-हावड़ा - इन सभी का उद्घाटन मेरे हाथों हुआ.” उन्होंने ईस्ट-वेस्ट मेट्रो रेल लाइन के मार्ग में व्यावहारिक बदलाव किए, जिससे इसका कार्यान्वयन संभव हुआ. साथ ही, विश्व स्तरीय स्टेशन बनाने की घोषणा भी की थी.

मुख्यमंत्री के रूप में रही काफी सक्रियता

ममता ने लिखा, “मुझे इस बात पर गर्व है कि बाद में, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में भी, मैंने इन परियोजनाओं के काम सक्रिय रूप से पूरे किए.” उन्होंने मुफ्त जमीन, सड़क निर्माण, विस्थापित लोगों के पुनर्वास और बाधाओं को दूर करने की व्यवस्था की. राज्य के मुख्य सचिवों ने समन्वय बैठकों के माध्यम से कार्यकारी एजेंसियों के बीच तालमेल सुनिश्चित किया, जिससे परियोजनाएं तेजी से पूरी हुईं.