नंदीग्राम-रेजीनगर में TMC का दांव, ममता बनर्जी की पार्टी ने घोषित किए उम्मीदवार; 6 अक्टूबर को होगा उपचुनाव
पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए TMC ने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. मतदान 6 अक्टूबर को होगा, जबकि नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे.
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के नाम सामने रख दिए हैं. पार्टी ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को मैदान में उतारा है. दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को वोटिंग होगी.
TMC ने नंदीग्राम और रेजीनगर में उतारे उम्मीदवार
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान को अपना प्रत्याशी बनाया है. वहीं रेजीनगर सीट पर पार्टी ने रबीउल आलम चौधरी पर भरोसा जताया है. इन दोनों सीटों पर होने वाला चुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है. मतदान 6 अक्टूबर को होगा और वोटों की गिनती के बाद 9 अक्टूबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे.
पांच सीटों और एक लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक पश्चिम बंगाल के अलावा तमिलनाडु, पुडुचेरी और असम में भी उपचुनाव होंगे. तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम सीटों पर वोटिंग होगी, जबकि पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा. असम की नगांव लोकसभा सीट भी इसी चरण में शामिल है. सभी सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर को होगा.
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9 सितंबर से शुरू होगी चुनावी प्रक्रिया
उपचुनाव के लिए 9 सितंबर को अधिसूचना जारी की जाएगी. उम्मीदवार 16 सितंबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे, जबकि 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी. प्रत्याशी 19 सितंबर तक अपना नाम वापस ले सकते हैं. निर्वाचन आयोग ने बताया है कि सभी मतदान केंद्रों पर EVM और VVPAT का इस्तेमाल किया जाएगा. आयोग के अनुसार इसके लिए पर्याप्त मशीनों की व्यवस्था की गई है.
क्यों खाली हुईं नंदीग्राम और रेजीनगर सीटें?
नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखने का फैसला किया था. वहीं रेजीनगर और नवदा दोनों सीटों से जीतने वाले आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर ने नवदा सीट बरकरार रखी और रेजीनगर छोड़ दी. दूसरी ओर तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी दो-दो सीटों के खाली होने की वजह अलग-अलग राजनीतिक फैसले रहे. असम की नगांव सीट कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई, जिन्होंने बाद में बीजेपी का दामन थाम लिया.