कोलकाता के 40 वर्षीय शोभन चक्रवर्ती एक प्रशिक्षित संगीत शिक्षक हैं. कोरोना महामारी से पहले वे बच्चों को रवींद्र संगीत, तबला और शैक्षणिक विषय पढ़ाकर प्रतिमाह लगभग 20 हजार रुपये कमा लेते थे. हालांकि, लॉकडाउन के दौरान उनके अधिकांश छात्रों ने पढ़ाई छोड़ दी, जिससे उनकी आय घटकर मात्र 5,000 रुपये रह गई. आर्थिक तंगी से निपटने के लिए शोभन को तीन साल पहले एक आवासीय सोसाइटी में नाइट सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करनी पड़ी.
जुलाई में एक परिचित के अनुरोध पर शोभन ने अपनी छुट्टी के दिन यूनिफॉर्म में रवींद्र संगीत गाते हुए एक वीडियो शूट करवाया. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. हालांकि, इस प्रसिद्धि के कारण उन्हें अपनी गार्ड की नौकरी गंवानी पड़ी. सोसाइटी प्रबंधन ने उनके काम के दौरान गाने और अन्य अजीबोगरीब कारण बताते हुए उन्हें तुरंत काम पर आने से मना कर दिया. इस घटना से निराश शोभन ने अपनी मां के संबल और प्रोत्साहन के बाद दोबारा हिम्मत जुटाई.
नौकरी गंवाने की खबर इंटरनेट पर फैलते ही लोगों ने शोभन का समर्थन करना शुरू कर दिया. इस समर्थन के दम पर उन्हें छह नए छात्र मिल गए हैं, जिन्हें वह साइकिल से जाकर संगीत सिखाते हैं. हालांकि, आय अभी भी पहले जैसी नहीं है, फिर भी शोभन किसी से वित्तीय दान नहीं चाहते. उनका कहना है कि लोग उन्हें पढ़ाने के लिए छात्र दें और एक शिक्षक की फीस पर मोलभाव न करें.
शोभन चक्रवर्ती का यह सफर साबित करता है कि कठिन परिस्थितियां भी हौसले को नहीं तोड़ सकतीं. जिस आवाज और गायकी की वजह से उनकी नौकरी छूटी, वही आज उनके जीवन को फिर से पटरी पर लाने का साधन बन गई है. आज भी वह यही सवाल पूछते हैं कि आखिर गाना गाना कोई अपराध कैसे हो सकता है?