'हर वक्त भारत के बारे में नहीं सोच सकते', BRICS के सवाल पर क्यों भड़के बांग्लादेश के मंत्री?

BRICS सम्मेलन में शामिल नहीं होने के बाद बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्तों को नए सिरे से तय करने की बात कही है. हुमायूं कबीर ने द्विपक्षीय संवाद और पुराने तौर-तरीकों से आगे बढ़ने पर जोर दिया.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: बांग्लादेश और भारत के रिश्तों को लेकर एक बार फिर नई बहस शुरू हो गई है. BRICS सम्मेलन में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की गैरमौजूदगी के बाद ढाका ने कहा है कि वह भारत के साथ संबंधों को नए नजरिए से आगे बढ़ाना चाहता है. विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों को पिछले 15 वर्षों के ढांचे से आगे ले जाने की जरूरत है. उन्होंने तारिक रहमान की भारत यात्रा को बहुपक्षीय मंच के बजाय द्विपक्षीय दौरे के रूप में कराने की बात कही.

ढाका में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हुमायूं कबीर से पूछा गया कि क्या तारिक रहमान संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. इस पर उन्होंने कहा कि भारत को लेकर अत्यधिक केंद्रित रहने के बजाय बांग्लादेश को व्यापक विदेश नीति पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने भारत को एक पड़ोसी देश बताते हुए कहा कि ढाका उसके साथ अच्छे द्विपक्षीय संबंध चाहता है.

रिश्तों को नए सिरे से शुरू करने की तैयारी

कबीर ने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ संबंधों को बदलते क्षेत्रीय परिदृश्य के हिसाब से आगे बढ़ाना चाहता है. उनका संकेत साफ था कि ढाका अब पिछले 15 वर्षों के दौरान बने संबंधों के तरीके को उसी रूप में जारी रखने के पक्ष में नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा हो तो उसका मुख्य आधार द्विपक्षीय बातचीत और दोनों देशों के बीच नए रिश्ते तय करना होना चाहिए.


BRICS निमंत्रण पर क्यों अटका मामला?

BRICS सम्मेलन में तारिक रहमान के नहीं पहुंचने की मुख्य वजह निमंत्रण का प्रारूप रहा. भारत ने उन्हें सम्मेलन के आउटरीच सत्र में BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर आमंत्रित किया था. ढाका का कहना था कि निमंत्रण बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं था. भारत ने यह भी स्पष्ट किया था कि तारिक रहमान को अलग से द्विपक्षीय भारत यात्रा का निमंत्रण पहले से दिया गया है.

भारत ने क्या कहा, ढाका का क्या रुख?

भारत के मुताबिक BRICS आउटरीच सत्र में क्षेत्रीय संगठनों के प्रमुखों को आमंत्रित करने की प्रक्रिया के तहत तारिक रहमान को बुलाया गया था. ढाका ने इस आधार पर सम्मेलन में शामिल होने से इनकार कर दिया. हुमायूं कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के लिए सही समय और अनुकूल माहौल का इंतजार किया जाएगा. यानी दोनों पक्ष यात्रा की संभावना से इनकार नहीं कर रहे, लेकिन उसके स्वरूप को लेकर मतभेद है.

शेख हसीना का मुद्दा भी अहम

भारत-बांग्लादेश संबंधों में शेख हसीना का प्रत्यर्पण भी संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है. हसीना के भारत में रहने के बाद दोनों देशों के बीच कई मामलों पर मतभेद सामने आए हैं. इसी बीच ढाका 101 द्विपक्षीय समझौतों की संसदीय समीक्षा की बात भी कर रहा है. ऐसे में तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा दोनों देशों के बीच रिश्तों की नई दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है.