भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस इस बार एक और भी ज्यादा खास बदलाव के साथ मनाने जा रहा है. 15 अगस्त को दिल्ली के लाल किले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 13वीं बार तिरंगा फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे. इस बार समारोह में एक ऐसी परंपरा जुड़ने जा रही है, जो अब तक लाल किले के मुख्य कार्यक्रम का हिस्सा नहीं रही थी.
प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की प्रस्तुति होगी. इसके बाद राष्ट्रगान 'जन गण मन' भी अपनी निर्धारित भूमिका में रहेगा.
लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक ध्वजारोहण समारोह में अब तक राष्ट्रगान को ही प्रमुख स्थान दिया जाता था. इसके पीछे केवल प्रोटोकॉल ही नहीं, बल्कि आजादी से पहले का एक पुराना विवाद भी जुड़ा हुआ है. बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंद मातृभूमि की स्तुति पर केंद्रित हैं. हालांकि, आगे के छंदों में देवी दुर्गा और हिंदू धार्मिक प्रतीकों से जुड़े संदर्भ आते हैं. इन्हीं संदर्भों को लेकर मुस्लिम लीग समेत कुछ पक्षों ने आपत्ति जताई थी.
देश की विविधता और धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए 1937 में वंदे मातरम के शुरुआती दो छंदों को ही सार्वजनिक आयोजनों में इस्तेमाल करने का फैसला किया गया. महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह भी इस फैसले के पीछे महत्वपूर्ण मानी जाती है. आजादी के बाद 1950 में संविधान सभा ने जन गण मन को राष्ट्रगान और वंदे मातरम के शुरुआती दो छंदों को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया. इस तरह दोनों को राष्ट्रीय सम्मान मिला, लेकिन सरकारी कार्यक्रमों के प्रोटोकॉल में राष्ट्रगान की अलग भूमिका बनी रही.
अब राष्ट्रीय समारोहों की परंपरा में बदलाव किया गया है. जुलाई 2026 में संसद ने Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 पारित किया. इसके तहत वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान किया गया है. 1971 के Prevention of Insults to National Honour Act में संशोधन के जरिए वंदे मातरम को भी शामिल किया गया है. इसके गायन के दौरान जानबूझकर बाधा डालना अब अपमान की श्रेणी में माना जाएगा और इसके लिए कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा. इस बदलाव के बाद 15 अगस्त 2026 का लाल किले का समारोह ऐतिहासिक होने जा रहा है. पहली बार मुख्य कार्यक्रम में वंदे मातरम की गूंज और जन गण मन दोनों राष्ट्रीय भावनाओं के प्रतीक के रूप में साथ दिखाई देंगे.