दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सोमवार को उमर खालिद की किताब Fractured Communities से जुड़े कार्यक्रम को लेकर विवाद हो गया. कार्यक्रम के दौरान वामपंथी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों के बीच नारेबाजी हुई. एक पक्ष ने उमर खालिद की रिहाई की मांग की, जबकि दूसरे पक्ष ने उनके खिलाफ नारे लगाए.
कार्यक्रम के दौरान ABVP से जुड़े छात्रों ने उमर खालिद के खिलाफ नारेबाजी की. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारी छात्रों ने उनके लिए कठोर सजा की मांग करते हुए नारे लगाए. इस दौरान कुछ छात्रों ने उमर खालिद के पिता और प्रतिबंधित संगठन SIMI से कथित संबंधों का उल्लेख करते हुए पोस्टर भी प्रदर्शित किए. छात्रों ने कश्मीर, बांग्लादेश और संदेशखाली से जुड़े मुद्दों पर भी नारेबाजी की.
दूसरी ओर, वामपंथी छात्र समूहों से जुड़े छात्रों ने उमर खालिद की रिहाई के समर्थन में नारे लगाए. प्रदर्शन के दौरान शरजील इमाम सहित जेल में बंद अन्य लोगों की रिहाई की मांग भी उठाई गई. इस तरह कार्यक्रम का केंद्र किताब से ज्यादा राजनीतिक विरोध और समर्थन बन गया.
ABVP supporters disrupted a discussion on a book on Umar Khalid organised by JNUSU.
— Vishu Adhana (@vishu_reports) August 10, 2026
The event witnessed major disruptions, with both sides engaging in a sloganeering contest, attempting to outdo each other.
“Umar Khalid ko fansi do” pic.twitter.com/MS4lfOdkvM
उमर खालिद की किताब पर चर्चा का कार्यक्रम JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के ऑडिटोरियम के बाहर प्रस्तावित था. शुरुआत में कार्यक्रम को अनुमति दिए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में डीन कार्यालय ने इसकी अनुमति वापस ले ली. विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, आयोजकों ने कार्यक्रम से जुड़ी कुछ जानकारियां पहले उपलब्ध नहीं कराई थीं, जिसके कारण अनुमति रद्द की गई.
अनुमति रद्द होने के बावजूद JNU छात्र संघ ने कार्यक्रम को निर्धारित समय पर आयोजित करने का फैसला किया. इसके बाद कार्यक्रम ऑडिटोरियम के भीतर करने के बजाय उसके सामने खुले स्थान पर आयोजित किया गया. इसी दौरान अलग-अलग छात्र समूह वहां पहुंचे और नारेबाजी शुरू हो गई.
उमर खालिद दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आरोपी हैं और लंबे समय से जेल में हैं. उनकी जमानत और मुकदमे को लेकर मामला अदालतों में विचाराधीन है. JNU में किताब पर कार्यक्रम के दौरान हुई नारेबाजी ने एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसर में छात्र राजनीति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है.