केरल की एक अदालत ने सोमवार को दक्षिणपंथी टिप्पणीकार टीजी मोहनदास को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में जमानत दे दी. तिरुवनंतपुरम अतिरिक्त मुख्य न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट कोर्ट के न्यायाधीश मिथुन गोपी जीएस ने रिमांड कार्यवाही के दौरान उन्हें जमानत दी. पुलिस ने उन्हें रविवार शाम गिरफ्तार किया था.
तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस स्टेशन की टीम ने मोहनदास को मट्टनचेरी के पास कूवाप्पडम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया था. यह कार्रवाई उनके यूट्यूब चैनल ‘पत्रिका’ पर अपलोड किए गए एक वीडियो को लेकर हुई. वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी.
पुलिस के मुताबिक, वीडियो में मोहनदास ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक और यौन हिंसा से जुड़ी टिप्पणी की थी. आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान सामूहिक दुष्कर्म जैसी घटनाओं की आशंका जताई और महिलाओं को लेकर बेहद विवादित टिप्पणी की. उन्होंने यह भी दावा किया था कि हिंसक स्थिति में कुछ लोगों की मौत या गंभीर चोट हो सकती है.
शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोप लगाया कि वीडियो का उद्देश्य सार्वजनिक शांति भंग करना और लोगों में भय व अशांति पैदा करना था. इसके बाद मोहनदास के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और केरल पुलिस अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया. साइबर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाने के लिए उनकी हिरासत की मांग की थी.
अदालत में अभियोजन पक्ष ने कहा कि जांच के दौरान अतिरिक्त धाराएं भी लगाई गई हैं. इनमें महिला की गरिमा का अपमान करने वाले शब्द, इशारे या व्यवहार तथा गंभीर धमकी से संबंधित प्रावधान शामिल हैं. पुलिस ने अदालत से हिरासत की मांग करते हुए आशंका जताई कि प्रभावशाली होने के कारण आरोपी गवाहों को प्रभावित या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं.
मोहनदास के वकील ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी स्थिति का हवाला देते हुए जमानत की मांग की. बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि लगाए गए अपराध जमानती प्रकृति के हैं. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उन्हें जमानत दे दी, हालांकि जांच में सहयोग सुनिश्चित करने के लिए कई शर्तें भी लगाई गईं.
अदालत ने मोहनदास को जांच अधिकारी के समक्ष लगातार तीन दिन उपस्थित होने का निर्देश दिया है. जरूरत पड़ने पर उन्हें पुलिस के सामने पेश होना होगा. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत की अवधि में वह इसी तरह का अपराध दोबारा नहीं करेंगे. फिलहाल मामले की जांच फिलहाल जारी है.