menu-icon
India Daily

Abbas Araghchi India Visit: भारत-पाकिस्तान में थम जाएगा तनाव, बैकफुट पर आएंगे दोनों देश!, 8 मई को तस्वीर हो जाएगी साफ

Pahalgam Terror Attack: भारत में ईरान के एम्बेसी ने ट्वीट किया है कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद इस गुरुवार (8 मई, 2025) को भारत की यात्रा करेंगे.

Ritu Sharma
Edited By: Ritu Sharma
Abbas Araghchi India Visit: भारत-पाकिस्तान में थम जाएगा तनाव, बैकफुट पर आएंगे दोनों देश!, 8 मई को तस्वीर हो जाएगी साफ
Courtesy: Social Media

Abbas Araghchi India Visit: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची 8 मई 2025 को भारत यात्रा पर आने वाले हैं. भारत में ईरानी दूतावास ने एक ट्वीट में पुष्टि करते हुए कहा, ''ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बातचीत करने के बाद इस गुरुवार (8 मई, 2025) को भारत आने वाले हैं.'' अराघची का यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब भारत और पाकिस्तान के बीच हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.

22 अप्रैल के हमले ने बढ़ाया तनाव

बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कई निर्दोष लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में खटास और गहराई. इसके बाद पाकिस्तान की ओर से नियंत्रण रेखा (LoC) पर लगातार सीजफायर उल्लंघन जारी है. हालांकि भारतीय सेना ने पुंछ सेक्टर में पाकिस्तानी फायरिंग का माकूल जवाब दिया है.

जांच में जुटे सुरक्षाबल

वहीं हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं. पुलिस और आर्मी की संयुक्त टीमें हमले की तह तक जाने में जुटी हैं. स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि हमलावरों के मददगारों की पहचान की जा सके. आतंकी नेटवर्क और उनके सपोर्ट सिस्टम को बेनकाब करने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान भी चलाया जा रहा है.

अराघची की यात्रा के मायने क्या हैं?

बताते चले कि अराघची का दौरा सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा का जरिया बन सकता है. पाकिस्तान में बातचीत के बाद उनका भारत आना यह संकेत देता है कि ईरान इस पूरे मसले में बैलेंस बनाकर चलना चाहता है और दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में कोई पहल कर सकता है.

अब नजरें दिल्ली पर

बहरहाल, 8 मई को अराघची की भारत यात्रा के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से उनकी बातचीत तय मानी जा रही है. इसमें द्विपक्षीय संबंधों के अलावा क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर भी चर्चा हो सकती है.