नई दिल्ली: तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के साथ ही एक बड़ा राजनीतिक विवाद भी सामने आ गया है. मुख्यमंत्री के रूप में जोसेफ सी विजय के शपथ ग्रहण समारोह में गीतों के बजने के क्रम ने सियासी माहौल गरमा दिया है. चेन्नई में हुए इस सरकारी कार्यक्रम में सबसे पहले 'वंदे मातरम', फिर राष्ट्रगान 'जन गण मन' और आखिर में 'तमिल थाई वजथु' बजाया गया. इसी क्रम को लेकर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने कड़ी नाराजगी जताई है और इसे राज्य की सांस्कृतिक परंपरा के खिलाफ बताया है.
रविवार को चेन्नई में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में टीवीके प्रमुख जोसेफ सी विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. समारोह के दौरान गीतों का क्रम अचानक राजनीतिक बहस का विषय बन गया. सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत 'वंदे मातरम' से हुई, जबकि तमिलनाडु का राज्य गीत सबसे अंत में बजाया गया. इसके बाद विपक्षी दलों और वामपंथी नेताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए.
सीपीआई के राज्य सचिव एम वीरपांडियन ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि तमिलनाडु की पुरानी परंपरा के अनुसार हर सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत 'तमिल थाई वजथु' से होती है और समापन राष्ट्रगान के साथ किया जाता है. ऐसे में राज्य गीत को तीसरे स्थान पर रखना तमिल संस्कृति और राज्य की पहचान का अपमान माना जा रहा है.
विवाद केवल गीतों के क्रम तक सीमित नहीं रहा. सीपीआई ने 'वंदे मातरम' को लेकर भी सवाल उठाए हैं. वीरपांडियन ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय ही यह तय हो गया था कि 'वंदे मातरम' राष्ट्रगान की जगह नहीं ले सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि यह गीत धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है और सरकारी कार्यक्रमों में इसे प्राथमिकता देना उचित नहीं माना जा सकता.
सीपीआई नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए लोक भवन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि समारोह के एजेंडे में बदलाव जानबूझकर किया गया. वीरपांडियन का कहना है कि कथित निर्देशों के बाद ही 'वंदे मातरम' को सबसे पहले बजाया गया और राज्य गीत को पीछे कर दिया गया. इसे राज्य की स्थापित परंपराओं का खुला उल्लंघन बताया जा रहा है.
विवाद बढ़ने के बाद सीपीआई ने तमिलनाडु सरकार से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की है. पार्टी चाहती है कि सरकार बताए कि कार्यक्रम के क्रम में बदलाव किसके निर्देश पर हुआ. साथ ही टीवीके से भी आग्रह किया गया है कि भविष्य में 'तमिल थाई वजथु' को उसका पारंपरिक और सम्मानजनक स्थान सुनिश्चित किया जाए ताकि दोबारा ऐसा विवाद खड़ा न हो.