सोमवार को वक्फ संशोधन बिल पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीति तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने प्रेस वार्ता कर कहा कि यह फैसला संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता की जीत है.
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने गैर-संवैधानिक बिल लाकर संसद का समय बर्बाद किया और अब अदालत ने उनकी कोशिशों पर रोक लगा दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन बिल की कई धाराओं को खारिज करते हुए साफ किया कि वक्फ संपत्तियों के मामलों में जिलाधिकारी नहीं, बल्कि वक्फ बोर्ड ही निर्णय करेगा. अदालत ने यह भी कहा कि केंद्रीय वक्फ बोर्ड का सीईओ मुस्लिम समुदाय से ही होना चाहिए और बोर्ड में बहुमत मुस्लिम समुदाय के सदस्यों का होना जरूरी है.
साथ ही, अदालत ने यह प्रावधान भी गलत ठहराया कि केवल पांच साल लगातार मुस्लिम रीति-रिवाज मानने वाला व्यक्ति ही दान कर सकता है. संजय सिंह ने कहा कि यह फैसला देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखे संविधान की आत्मा को मजबूत करता है.
आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इस बिल का असली मकसद वक्फ की जमीनें कब्जा कर उन्हें अडानी समेत प्रधानमंत्री के पूंजीपति दोस्तों को सौंपना था. उन्होंने कहा कि देशभर में वक्फ की संपत्तियां प्रमुख स्थानों पर हैं और सरकार इन्हें औने-पौने दामों पर अपने ‘दोस्तों’ को देना चाहती थी.
संजय सिंह ने कहा कि भाजपा हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर राजनीति कर रही थी, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान अडानी का हुआ है क्योंकि अदालत ने सरकार की योजना पर रोक लगा दी है.
संजय सिंह ने याद दिलाया कि वक्फ संशोधन बिल पर बनी संसदीय कमेटी में वे खुद सदस्य थे. उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्षता वाली इस कमेटी में विपक्षी दलों ने बार-बार सरकार को चेताया कि यह बिल संविधान के खिलाफ है, लेकिन सरकार ने किसी की नहीं सुनी.
बिल में जिलाधिकारियों को अनावश्यक शक्तियां दी गई थीं और धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करने की कोशिश की गई थी. उन्होंने कहा कि यह केवल मुस्लिम समुदाय पर ही नहीं, बल्कि भविष्य में जैन मंदिरों, गुरुद्वारों और चर्चों पर भी लागू हो सकता था.
संजय सिंह ने भाजपा पर धर्म के नाम पर धंधा करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा का मकसद सभी धार्मिक संपत्तियों पर कब्जा कर उन्हें कारोबार के लिए पूंजीपतियों को सौंपना है. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय की 13 हजार एकड़ जमीन अडानी को दी जा चुकी है और अयोध्या में भी बड़े पैमाने पर जमीनें कब्जाई गई हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भाजपा की नफरत और कारोबार की राजनीति को बेनकाब करता है.