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India Daily

'जांच में सीएम का दखल मंजूर नहीं', आई-पैक मामले में सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख; ममता बनर्जी को लगाई कड़ी फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने आई-पैक मामले में ममता बनर्जी द्वारा ईडी की छापेमारी में हस्तक्षेप पर कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों को ऐसी स्थिति में बिना उपचार के नहीं छोड़ा जा सकता.

KanhaiyaaZee
'जांच में सीएम का दखल मंजूर नहीं', आई-पैक मामले में सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख; ममता बनर्जी को लगाई कड़ी फटकार
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट में कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा. मामला आई-पैक कार्यालय पर ईडी की छापेमारी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप से जुड़ा है. न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने इसे 'अप्रिय स्थिति' करार दिया. अदालत ने कहा कि यदि कोई मुख्यमंत्री जांच एजेंसी के काम में बाधा डालता है, तो इसके कानूनी समाधान की जरूरत है. यह मामला अब एक बड़े प्रशासनिक विवाद में बदल गया है.

अदालत ने कहा कि मुख्यमंत्री का कथित तौर पर सरकारी कार्यालय में घुसकर हस्तक्षेप करना गंभीर विषय है. पीठ ने सवाल किया कि अगर अन्य मुख्यमंत्री भी ऐसा करते हैं, तो क्या समाधान होगा? सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि ऐसी परिस्थितियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जा सकती है. अदालत ने स्पष्ट किया कि एजेंसियों को असहाय नहीं छोड़ा जा सकता.

बंगाल सरकार की दलीलें और प्रतिक्रिया 

अधिवक्ता श्याम दीवान ने तर्क दिया कि संविधान में समाधान मौजूद हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र को स्वतंत्र कार्य के बजाय कानूनी कार्यवाही शुरू करनी चाहिए. हालांकि, अदालत ने बंगाल की स्थगन की मांग खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि वे रिकॉर्ड पर मौजूद हर तथ्य पर विचार करेंगे. न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि वे किसी के निर्देशों पर काम नहीं करेंगे.

क्या है पूरा मामला?

विवाद 8 जनवरी को कोलकाता में आई-पैक कार्यालय और प्रतीक जैन के आवास पर हुई छापेमारी से जुड़ा है. ईडी का आरोप है कि ममता बनर्जी छापे के दौरान वहां पहुंची थीं. वे छापेमारी के बीच ही लैपटॉप, फोन और कई फाइलें लेकर बाहर निकल आईं. इसके बाद वे साल्ट लेक स्थित दूसरे कार्यालय भी गईं और वहां से भी दस्तावेज अपने साथ ले गईं.

ईडी के आरोप और ममता का दावा 

ईडी ने इसे 'शक्ति का घोर दुरुपयोग' बताया है. यह कार्रवाई कोयला घोटाले के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई थी. दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने छापों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आगामी चुनावों से पहले एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है. बता दें कि बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है.

देरी की रणनीति पर तीखी टिप्पणी 

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्थगन का विरोध करते हुए इसे देरी की रणनीति बताया. उन्होंने कहा कि ईडी का जवाब हफ्तों पहले दाखिल हो चुका था. न्यायमूर्ति मिश्रा ने स्पष्ट किया कि अदालत किसी के डिक्टेशन पर नहीं चलेगी. पीठ ने बंगाल सरकार की अतिरिक्त समय की मांग ठुकरा दी. इस महत्वपूर्ण मामले पर अब अगले हफ्ते फिर से विस्तार से सुनवाई होगी.