देश की संसद आज से तीन दिन के विशेष सत्र में बैठ रही है. इस सत्र में सरकार तीन बड़े विधेयक पेश करने वाली है, जो भारत की चुनावी व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकते हैं. इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र कानून संशोधन विधेयक शामिल हैं. सरकार का मकसद 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से परिसीमन कर लोकसभा की सीटें बढ़ाना और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण को लागू करना है. विपक्ष इस परिसीमन का विरोध कर रहा है और इसे दक्षिण भारतीय राज्यों के खिलाफ बता रहा है.
सत्र का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा महिला आरक्षण को लागू करना है. वर्ष 2023 में पास हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अब तक लागू नहीं किया जा सका था क्योंकि यह नए परिसीमन पर निर्भर था. सरकार अब संविधान संशोधन के जरिए इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने का रास्ता तैयार कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की है. भाजपा ने अपने सभी सांसदों के लिए तीन दिवसीय व्हिप जारी किया है. सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं को राजनीति में उनकी सही भागीदारी मिल सकेगी.
परिसीमन विधेयक 2026 के तहत 1971 की जनगणना की जगह 2011 की जनगणना को आधार बनाकर नए सिरे से सीटों का बंटवारा किया जाएगा. इससे लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर करीब 850 हो सकती हैं. सरकार का कहना है कि जनसंख्या में बदलाव, शहरीकरण और प्रवास के कारण कई क्षेत्रों में असमानता आ गई है, इसलिए नया परिसीमन जरूरी है. लेकिन विपक्षी दल, खासकर दक्षिण के राज्यों का कहना है कि इससे उत्तर भारत के राज्यों को फायदा होगा और दक्षिण के राज्यों की राजनीतिक आवाज कमजोर हो जाएगी
विपक्षी दलों ने परिसीमन का तीखा विरोध किया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार राजनीतिक फायदे के लिए जल्दबाजी में बदलाव कर रही है. द्रमुक ने परिसीमन के खिलाफ काले झंडे का प्रदर्शन करने की घोषणा की है. विपक्ष का तर्क है कि 2021 की जनगणना (2027 में आने वाली) का इंतजार किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि इतने बड़े संवैधानिक बदलाव को सिर्फ तीन दिन के सत्र में क्यों लाया जा रहा है. INDIA गठबंधन महिला आरक्षण का सिद्धांततः समर्थन करता है लेकिन परिसीमन विधेयक का विरोध कर रहा है.
यह विशेष सत्र भारत की चुनावी राजनीति और संघीय ढांचे को प्रभावित करने वाला साबित हो सकता है. अगर विधेयक पास हो गए तो 2029 के चुनाव में महिला आरक्षण लागू हो जाएगा और लोकसभा की सीटें भी बढ़ जाएंगी. इससे उत्तर और दक्षिण राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है. सत्र में तीखी बहस की उम्मीद है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस सत्र का नतीजा आने वाले वर्षों की भारतीय राजनीति की दिशा तय करेगा.