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शिवसेना UBT में बड़ी टूट! 7 सांसद और कई विधायक बदलेंगे पाला?

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं. दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 7 सांसद और 14 से 16 विधायक आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकते हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
शिवसेना UBT में बड़ी टूट! 7 सांसद और कई विधायक बदलेंगे पाला?
Courtesy: ani

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर हलचल से भरे दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को लेकर राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है. शिंदे गुट के नेताओं की ओर से दावा किया जा रहा है कि पार्टी के कुछ सांसद और विधायक असंतुष्ट हैं और वे जल्द ही नई राजनीतिक दिशा चुन सकते हैं. हालांकि अभी तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है लेकिन बयानों ने सियासी तापमान जरूर बढ़ा दिया है.

7 सांसदों को लेकर बढ़ी सियासी हलचल

शिवसेना के विधान परिषद सदस्य कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि शिवसेना (यूबीटी) के सात सांसदों के साथ बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. उनके अनुसार पिछले एक महीने से लगातार संपर्क और बैठकों का दौर चल रहा था. उन्होंने संकेत दिया कि संसद के मॉनसून सत्र से पहले कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है. तुमाने ने इस पूरी प्रक्रिया को 'ऑपरेशन' की संज्ञा देते हुए कहा कि आवश्यक तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और अब केवल अंतिम निर्णय का इंतजार है. उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है.

विधायकों को लेकर भी लग रहे कयास

राजनीतिक सूत्रों के हवाले से ऐसी चर्चाएं भी सामने आ रही हैं कि 14 से 16 विधायक भी पार्टी छोड़ सकते हैं. यदि ऐसा होता है तो यह उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा झटका माना जाएगा. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. शिंदे गुट का कहना है कि कई जनप्रतिनिधि विकास कार्यों और क्षेत्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए नई राजनीतिक राह तलाश रहे हैं. वहीं विपक्षी दल इन दावों को केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति बता रहे हैं.

संजय राउत ने दावों को किया खारिज

दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इन सभी अटकलों को पूरी तरह निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि पार्टी में किसी प्रकार की टूट की स्थिति नहीं है और ऐसे बयान केवल भ्रम फैलाने के लिए दिए जा रहे हैं. राउत ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में कई राजनीतिक दलों को कमजोर करने की कोशिशें की गई हैं. फिलहाल दोनों पक्षों के दावों और जवाबी दावों के बीच सबकी नजर आने वाले दिनों पर टिकी हुई है क्योंकि तभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी.