Sharad Pawar Party Symbol: चुनाव आयोग ने गुरुवार को शरद पवार के नेतृत्व वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) गुट को एक नया चुनाव चिन्ह आवंटित किया है. एनसीपी-शरदचंद्र पवार खेमे को नया चुनाव चिन्ह 'तुरहा बजाता हुआ आदमी' दिया गया है. जिसे महाराष्ट्र में इसे 'तुतारी' बोलते हैं. बीते 6 फरवरी को चुनाव आयोग ने अजित पवार गुट को असली एनसीपी करार दिया था. चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और सिंबल 'घड़ी' अजित पवार गुट को सौंप दिया था.
पार्टी ने सोशल मीडिया एक्स पोस्ट में कहा "महाराष्ट्र के इतिहास में दिल्ली की गद्दी के कान खड़े करने वाले छत्रपति शिव राय का शौर्य आज 'राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद चंद्र पवार' के लिए गौरव का विषय है. छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रगतिशील विचारों के साथ महाराष्ट्र के आदर्श, फुले, शाहू, अम्बेडकर और ये 'तुतारी' शरद चंद्र पवार साहब के साथ दिल्ली का सिंहासन हिलाने के लिए एक बार फिर बिगुल बजाने को तैयार है!'
"एक तुतारी द्या मज आणुनि
फुंकिन मी जी स्वप्राणाने
भेदुनि टाकिन सगळी गगने
दीर्घ जिच्या त्या किंकाळीने
अशी तुतारी द्या मजलागुनी!"
“महाराष्ट्राच्या इतिहासात छत्रपती शिवरायांच्या शौर्यानं ज्या तुतारीने दिल्लीच्या तख्ताच्याही कानठळ्या बसवल्या होत्या, तीच 'तुतारी' आज निवडणूक चिन्ह… pic.twitter.com/LsgvjlWzuN— Nationalist Congress Party - Sharadchandra Pawar (@NCPspeaks) February 22, 2024Also Read
पिछले साल जुलाई में अजित पवार की ओर से आठ विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होने के बाद NCP विभाजित हो गई थी. इस महीने की शुरुआत में ईसीआई ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के नेतृत्व वाले गुट को 'एनसीपी' नाम और 'घड़ी चुनाव चिह्न' आवंटित किया था. भतीजे अजित को असली NCP का नाम और चुनाव चिह्न देने के चुनाव आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए शरद पवार ने दावा किया कि यह कानून के खिलाफ था. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था कि राजनीतिक पार्टी बनाने वालों को पार्टी से ही हटा दिया गया हो.
शरद पवार ने चुनाव आयोग और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के फैसले के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. अदालत ने निर्देश दिया कि गुट के लिए 'एनसीपी-शरदचंद्र पवार' नाम देने का चुनाव आयोग का आदेश अगले आदेश तक जारी रहेगा. शरद पवार गुट ने पार्टी के लिए तीन नाम चुनाव आयोग को दिए थे. इसमें से चुनाव ने 'एनसीपी शरद चंद्र पवार' पर मुहर लगाई थी. चुनाव आयोग ने तब पार्टी के सिंबल पर फैसला नहीं दिया था. चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ शरद पवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. 19 फरवरी को कोर्ट ने आदेश दिया था कि चुनाव आयोग एक हफ्ते के भीतर सिंबल आवंटित करे, जो बीते कल चुनाव आयोग ने दे दिया.