नई दिल्ली: आज देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. गणतंत्र दिवस सिर्फ एक नेशनल हॉलिडे नहीं है बल्कि यह उस दिन की याद दिलाता है, जब आधिकारिक तौर पर भारत एक गणतंत्र बना था. भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ था. तब से लेकर अब तक हर साल इस दिन को लोकतंत्र, एकता और कानून के शासन का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है.
भारत को 15 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी, लेकिन देश ने 26 जनवरी, 1950 को अपने संविधान के तहत खुद पर शासन करना शुरू किया था. संविधान ने भारतीयों को अपने नेता चुनने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में रहने का अधिकार दिया. बता दें कि संविधान तैयार करने की जिम्मेदारी ड्राफ्टिंग कमेटी की थी.
ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन 29 अगस्त, 1947 को हुआ था. इसमें सात सदस्य थे. यह समिति भारत का संविधान लिखने और उसे आकार देने के लिए बनाई गई थी. डॉ. बी. आर. अंबेडकर इस समिति के अध्यक्ष थे और उन्होंने इसके काम में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यहां जानें सभी 7 सदस्यों के बारे में.
डॉ. बी. आर. अंबेडकर एक वकील, अर्थशास्त्री और समाज सुधारक थे. उन्हें भारतीय संविधान का मुख्य निर्माता कहा जाता है. उन्होंने छुआछूत और भेदभाव को खत्म करने, दलितों और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए अथक प्रयास किया. संविधान में उन्होंने कई महत्वपूर्ण अधिकार और स्वतंत्रताएं उन्हीं की दी हुई हैं.
एन. गोपालस्वामी अय्यंगार भी इस कमेटी में थे, जो सम्मानित प्रशासक और शासन के विशेषज्ञ थे. उन्होंने कई महत्वपूर्ण संवैधानिक विचारों को आकार देने में मदद की. इसके साथ ही जम्मू और कश्मीर से संबंधित मामलों में भी उनका करीबी जुड़ाव था. उन्होंने आर्टिकल 370 का ड्राफ्ट बनाने में अहम भूमिका निभाई.
अगला नाम है अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर का, जो एक मशहूर वकील और कमेटी के बहुत सम्मानित सदस्य थे. उन्होंने कानूनी ढांचे और संवैधानिक स्पष्टता में बहुत बड़ा योगदान दिया. डॉ. अंबेडकर ने खुद उनकी बुद्धिमत्ता और कानूनी ज्ञान की तारीफ की थी.
चौथा नाम डॉ. के. एम. मुंशी का है, जो एक जाने-माने नेता, लेखक और वकील थे. उन्होंने भारतीय संस्कृति और शिक्षा का जोरदार समर्थन किया था. इसके बाद भारतीय विद्या भवन की स्थापना की. उन्होंने मौलिक अधिकारों और न्यायिक प्रावधानों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
सैयद मोहम्मद सादुल्ला उत्तर-पूर्वी भारत से एकमात्र सदस्य थे. कमेटी में मुस्लिम लीग के एकमात्र प्रतिनिधि थे. बाद में उन्होंने असम के पहले प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया और संविधान का ड्राफ्ट बनाने में योगदान दिया.
बी. एल. मित्तर कमेटी के मूल सदस्यों में से एक थे, लेकिन स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. बाद में उनकी जगह एन. माधवा राव ने ली.
डी. पी. खेतान एक और संस्थापक सदस्य थे, लेकिन संविधान पूरा होने से पहले ही 1948 में उनका निधन हो गया. उनकी जगह टी. टी. कृष्णामाचारी ने ली.