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राजस्थान में 4 राज्यों के आदिवासियों का जमावड़ा, आखिर क्यों हो रही अलग भील प्रदेश की मांग?

Banswara Mangarh Dham: राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के 40 से अधिक जिलों के आदिवासी आज बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम पहुंचे. यहां उन्होंने भील प्रदेश बनाने की मांग को एक बार फिर उठाया. हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने अलग भील प्रदेश की मांग को लेकर राजनीतिक प्रस्ताव भी पारित कर दिया. आदिवासी समाज के नेताओं ने कहा कि हम हिंदू नहीं हैं, कोई व्रत या त्योहार नहीं मनाते हैं.

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राजस्थान में 4 राज्यों के आदिवासियों का जमावड़ा, आखिर क्यों हो रही अलग भील प्रदेश की मांग?
Courtesy: Social Media

Banswara Mangarh Dham: राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के बागीदौरा विधानसभा क्षेत्र के आनंदपुरी तहसील क्षेत्र में मानगढ़ धाम स्थित है, जहां गुजरात की सरहद जुड़ती है. इस सरहद किनारे मानगढ़ धाम की ऊंची पहाड़ी है, जहां पर आज भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत और क्षेत्रीय विधायक जयकृष्ण पटेल के नेतृत्व में आदिवासी सांस्कृतिक महा रैली कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इस कार्यक्रम में आदिवासी समाज की ओर से अलग भील प्रदेश बनाने की मांग उठाई गई है. कहा जा रहा है कि अब भारत आदिवासी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेगा.

मानगढ़ धाम पर राजस्थान के अलावा, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के आदिवासी समाज के लोग पहुंचे. आदिवासी समाज के लोगों के बीच भारत आदिवासी पार्टी के नेता राजकुमार रोत ने कहा कि हमारे पूर्वजों की मांग थी कि ये क्षेत्र भील प्रदेश बने. उनकी इसी मांग को हम फिर से उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे प्रदेशों से सटे हुए करीब 40 जिलों को मिलाकर एक अलग भील प्रदेश बनाया जाए.

संसद में शपथ के बाद लगाया था जय भील प्रदेश का नारा

हाल ही में बांसवाड़ा जिले की बागीदौरा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ था. चुनाव में भारत आदिवासी पार्टी से प्रत्याशी जयकृष्ण पटेल 52 हजार वोटों से जीते थे. जीत के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में ऐलान किया था कि हम भील प्रदेश की मांग कर रहे हैं और अलग से भील प्रदेश बनाएंगे. इस दौरान मौजूद भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने भी कहा था कि अब हमारा पहला मकसद भील प्रदेश बनाना है. राजकुमार रोत ने सांसदी का चुनाव जीतने के बाद संसद में शपथ ली थी और जय भील प्रदेश... जय जोहार का नारा लगाया था.

आखिर क्यों हो रही है अलग भील प्रदेश की मांग?

कहते हैं कि मानगढ़ धाम पर 1500 आदिवासियों का नरसंहार हुआ था. इसके बाद बार-बार जो सरकार आई, उन्होंने यहां के लोगों के लिए विकास के काम तो जरूर किए, लेकिन भारत आदिवासी पार्टी से जुड़े लोगों का मानना है कि जल जमीन जंगल पर हमारा हक है. इस क्षेत्र में पांचवी अनुसूची लागू करने की बात, भील प्रदेश की मांग करते हैं. विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भी हमारी मांग उठी थी और इसी आधार पर हमारी पार्टी के नेताओं को जीत मिली. हालांकि, हाल ही में राजस्थान के जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि भील प्रदेश हरगिज नहीं बन सकता, क्योंकि हर जाति इस तरह से अपनी मांग करेगा तो क्या होगा? 

आदिवासी नेता बोले- हम हिंदू नहीं हैं

मानगढ़ धाम पर भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा की ओर से आयोजित सांस्कृतिक महारैली में मंगलसूत्र और हिंदुओं के त्योहारों को लेकर भी चर्चा हुई. आदिवासी परिवार के संस्थापक सदस्य मेनका डामोर ने कहा कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं और उनकी संस्कृति और हमारी संस्कृति अलग-अलग है. उन्होंने कहा कि हम न तो मंगलसूत्र पहनते हैं और न ही मैं सिंदूर लगाती हूं और न ही कोई व्रत और त्योहार करती हूं. 

भील प्रदेश की मांग में राजस्थान-मध्य प्रदेश के ये जिले शामिल

भारत आदिवासी पार्टी ने राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के 40 से अधिक जिलों को मिलाकर भील प्रदेश बनाने की मांग की है. 

पार्टी के नेताओं के मुताबिक, भील प्रदेश में राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बाड़मेर, जालोर, सिरोही, उदयपुर, झालावाड़, राजसमंद, चितौड़गढ़,कोटा, बारां और पाली को मिलाया जाए.

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के इंदौर, गुना, शिवपुर, मंदसौर, नीमच, रतलाम, धार, देवास, खंडवा,खरगोन, बुरहानपुर, बड़वानी और अलीराजपुर को भी इसमें मिलाया जाए.

इसके अलावा, महाराष्ट्र के नासिक, ठाणे, जलगांव, धुले, पालघर और नंदुबार जबकि गुजरात के अरवल्ली, महीसागर, दाहोद, पंचमहल, सूरत, बड़ोदरा, तापी, नवसारी, छोटा उदेपुर, नर्मदा, साबरकांठा, बनासकांठा, भरूच और वलसाड़ को भी भील प्रदेश में शामिल किया जाए.

कब हुआ था 1500 आदिवासियों का नरसंहार

कहानी के मुताबिक, गुजरात और राजस्थान के बॉर्डर पर मौजूद मानगढ़ की पहाड़ी के पास आजादी से पहले गोविंद गुरु नाम के आदिवासी नेता अपने साथियों के साथ मिलकर अंग्रेजी सरकार के खिलाफ आंदोलन चला रहे थे. 13 नवंबर 1913 को अंग्रेजी सेना ने गोविंद गुरु के साथियों को घेर लिया था और उनका सामूहिक नरसंहार किया गया था, जबकि उन्हें बंदी बना लिया गया था. उनकी याद में ही यहां मानगढ़ धाम बनाया गया है.